शनिवार, 30 मार्च 2013

अंजली


(मेरी कहानी अभी पुरी नही हुई है और बहुत कुछ बाकी है कोशिश करुँगा पुरी करने की ये तो सिर्फ कुछ अंश ही है लगभग 2 प्रतिशत 98 परसेंट बाकी है। मै अपनी इस रचना में मेरी कुछ यादें जो मै शायद कभी भूल नही पाउंगा और जिन हालातों से मै गुजर चुका हुँ और कैसे कैसे दौर मेरी जिन्दगी में आये किस तरह से मैने सपने बनाये थे और उन सपनों को अपने आंखों के सामने बिखरता देख कर मैे कितना दर्द अपने भीतर ले कर आज भी चलता हुं आप लोगों को बताना चाहता हुं कई लोगों को मेरी ये बातें पसंद नही आयेंगी या हो सकता है की आप भी मेरी तरह कभी ऐसे दौर से गुजर चुके होंगे या ऐसा भी हो सकता है कि आपका दर्द मेरे तकलीफ से भी गहरा हो लेकिन मै अपने दर्द को हमेशा लेकर चलना चाहुंगा क्योंकि ये दर्द ही मुझे आज इस मूकाम तक लेकर आई है और मै अपनी अंजली को कभी भुलना नही चाहुंगा वो आज मेरे साथ तो नही है लेकिन उसकी याद मेरे मन में है और वो मेरे ख्यालों में हमेशा रहेगी। मै दिन के 24 घण्टों में लगभग 14 घण्टे उसके यादों के साथ अपने आप को पाता हुं डयुटी में, दोस्तों के बीच, अकेले में हर जगह वो मेरे साथ होती है और मै इतना जानता हुं की वो भी मुझे दिन में एक बार याद जरुर करती है कई लोग मुझसे कहते हैं तुम सबसे अलग किस्म के आदमी हो न ठीक से हंसते हो और ना ठीक से रोते हो आखिर तुम्हारा मन क्या कहता है तुमसे, क्या तुम्हे हमारी तरह जीने का या रहने का मन नही करता, मै उनके सवाल का जवाब नही दे पाता हुं और शायद कभी दे भी नही पाउंगा। बस आप लोगों से मै इतना ही कह सकता हुं कि मै दुसरों की तरह नही बन सकता, क्योंकि मै उनकी तरह नही अपने आप की तरह हुं। अगर इतना सब कुछ जानने के बाद भी आप मेरी इस रचना को पढ़ना सही समझे ंतो आप के सामने मेरी सच्चाई है जिसे मै आप लोगों के लिए लिख रहा हँु इसमें कहीं भी किसी प्रकार की बनावटी बातों को मैने कोई स्थान नही दिया है ये मेरी और अंजली से संबंधीत है हम एक दुसरे से बहुत ही ज्यादा प्यार करते थे इतना ज्यादा की हमे कभी नही लगता था कि हम कभी अलग होंगे लेकिन हर इन्शान को एक न एक दिन किसी मजबूरी के सामने अपने घुटने टेंकने पड़ते हैं हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। और अंजली के सामने वो कौन सी परेशानी थी जिसका वो सामना नही कर सकी मेरे मन में हमेशा यह बात घुमती रहती है जिससे मै आज भी अंजान हुं जिसने मेरे साथ अपने जीवन के कई वर्ष बिता दिये और मेरे पास कोई शब्द नही है बस। भगवान करे वो हमेशा खुश रहे उसकी जिन्दगी से मेरी यादें समाप्त हो जायें और वो अपना घर बसा सके।
और रही बात मेरी तो मेरी पुरी जिन्दगी मैने उसके नाम कर दी है सिर्फ और सिर्फ उसके नाम। इसे मेरा पागलपन कहो या नादानी लेकिन यही मेरी सच्चाई है जो कभी बदल नही सकती )


अंजली
(सन् 2004) आज दुसरी बार मैने अंजली को देखा। वह जेण्डर की सबसे छोटी बहन है जो मेरे घर में पिछले कई वर्षों से अपने बाकी भाई-बहनों के साथ रह रहा था (लगभग 1998 से) कॉलेज की पढ़ाई पुरी करने के बाद अब ये घर जा चुके हैं और अब बारी है अंजली और उससे बड़ी बहन अंजु की।
अंजली दिखने में बहुत ही प्यारी और बहुत ही सुन्दर है लेकिन उसका व्यवहार उससे भी कई गुना अधिक अच्छा लगा मुझे और वाकई वो बहुत ही अच्छी है
अंजु जो उसकी बड़ी बहन है दोनों में उम्र का ज्यादा फासला तो नही है लेकिन फिर भी बड़ी बहन होने के नाते अंजली की सारी जिम्मेदारीयां और उसकी देख रेख की ज्वाबदारी अब अंजु के उपर ही है। बी.एस.सी में प्रवेश के लिए वो यहां आई है इससे पहले उसने कभी न तो रेलगाड़ी देखी है और न ही शहर की चकाचौंध रोशनी। शहर के बड़े बड़े बिल्डींग, पतली पतली गलीयां, यहां की सड़कों की भारी भीड़ और पता नही बहुत सी नई चीजें जो उसने पहले कभी नही देखी थी आज देख कर बहुत ही आश्चर्य चकित है वह बहुत खुश भी है कि शहर आने का मौका उसे एकबार फिर मिला है। शाम के लगभग 6 बजे हैं मै अपने दोस्तों से मिलकर घर लौटा हुँ घरवाले बहुत ही खुश हैं मेरी बहन मुझे बताती है अंजु और अंजली आई हैं हमारे घर में रहने अब ये भी हमारे ही घर में रहकर पढ़ेंगी। मुझे भी बहुत अच्छा लगा। बड़े भाई बहनों के मुह से हमेशा इनके बारे में सुनता था तो देखने कि इच्छा भी है अंजली को तो मै पहले से जानता था लेकिन अंजु से ये मेरी पहली मुलाकात थी मै इनके कमरे के बाहर ही खड़ा हूँ सोच रहा हूँ अन्दर जाउं या नही, जाउंगा तो पहले क्या कहुंगा या उनका पहला शब्द मेरे लिए क्या होगा? थोड़ा मन में हिचक भी है और थोड़ी उत्सुकता।
मैने अंजु दीदी को पहले देखा और मेरे मुँ से पहला शब्द निकला हववक मअमदपदह दीदी जी, उनका जवाब मिला हववक मअमदपदह, मुझे अन्दर बुलाया गया, अन्दर गया तो मैने अंजली को देखा
उसने मुझे बैठने के लिए कहा और चटाई बिछा दिया, और मै चुपचाप बैठ गया थोड़ी देर तो हम लोग शांत बैठ कर अपने मन में कुछ सोंचने लगे, फिर मुझे पुछा गया तुम कौन से क्लास में हो?
अभी 00000 पढ़ रहा हूं मेरा जवाब था। हम लोगों ने और भी बहुत सी बातें कि खुब हंसी मजाक भी किया और फिर एक दुसरे को गुड नाईट कह कर मै अपने कमरे में लौट आया।
अंजु का जॉब था और अंजली बस पढ़ने में मगन रहती थी दोनो ही गांव से थीं तो इनका शांत व्यवहार मुझे बहुत ही अच्छा लगता था मै हर रोज एक बार तो जरुर जाता था इनके पास और जिस दिन नही जाता वो मुझे बुलाने आ ही जाती थी क्योंकि मै मजाकिया आदमी हूँ और लोगों को हंसाना उनके साथ हंसना मुझे भी अच्छा लगता है।
समय बीतता चला गया और उनके साथ मै काफी घुल मिल गया हूँ आज दो साल हो चुके हैं लेकिन मै आज बहुत अकेला महसूस कर रहा हूँ कारण है मेरी दोस्त कि शादी उसका नाम संध्या है हम अच्छे दोस्त थे और उसकी शादी हो चुकी है मुझे खुशी भी है और थोड़ा दुख भी।
खुशी इस बात की है कि वो जिसे पसंद करती थी शादी भी उसी के साथ हो गई। और दुख इस बात का है कि मेरी सबसे अच्छी दोस्त मुझसे आज दूर हो रही है। मै अपने घर के आंगन में बैठ कर सोच रहा हूं उन पलों को जो हम लोगों ने साथ में बिताए थे और ये पल फिर लौट कर कभी नही आऐंगे।
अंजली ने मुझे देखते ही मेरी भावनाओं को परख लिया और मेरा मन बहलाने कि कोशिश कर रही है वो न्युज पेपर ले आई और वर्ग पहेली भरने लगे वैसे तो ये हमारी ( अंजली और मेरी ) रोज कि दिनचर्या थी लेकिन आज कुछ अलग ही लग रहा था किसी तरह आज का दिन तो बीत गया फिर भी मै अपने दोस्त को बहुत उपेे कर रहा हूँ
सुबह मेरी निंद जल्दी ही खुल गई मै बाहर टहलने निकल गया हूँ  अंजली,अंजु,सुहानी (अंजली की फ्रेन्ड), सुमन (सुहानी की भाभी) और जिम्मी (सुहानी का कुत्ता) सभी टहलने के लिए आ रहे हैं और मुझे दुर से ही देख कर हंस रहे हैं क्योंकि उन्होंने पहले कभी मुझे इतनी सुबह नही देखा था देखते ही उन्होंने मेरे उपर व्यंग्य कसना और हंसना शुरु कर दिया मै भी उनके हंसी मे शामिल हो गया, तभी सुहानी ने कहा श् चलो आज हमारे साथ टहल कर देखो शायद तुम्हे अच्छा लगेश् मै समझ नही पाया उन्के उस वर्ड को । अंजली ने मुझे सब बता दिया है तुम्हारी गर्ल फ्रेन्ड की शादी हो गई । मैने कुछ भी नही कहा क्योंकि मै समझ गया ये हमारी दोस्ती को प्यार समझ रहे हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही था। मैने कुछ भी नही कहा और हम मोरनिंग वॅाक के लिए आगे चल पड़े,मैने जिम्मी को पकड़ लिया लगभग आधे घण्टे के बाद हम घर लौट आए। आज का दिन बहुत ही अच्छा लग रहा था । अब तो हमलोग रोज ही सुबह उठकर टहलते और आकर न्युज पेपर पढ़ते । अंजली को भी मेरे साथ समय बीताना अच्छा लगता था आज अचानक अंजली ने मुझे एस.टी.डी साथ देने के लिए कहा मैने साथ दिया, रास्ते में अंजली ने कहा फोन जैसे उठायेंगे तुम बात करना और कहना जानकी से बात कराईये । मैने कहा पहले कभी किसी लड़की से मैने फोन पर बात नही किया है थोड़ा डर लग रहा है वो पहले तो खुब हंसी और अपनी हंसी पर काबू करते हुए बोली अरे पागल जानकी लड़का है  मुझे भी हंसी आई फिर मेने फोन लगाया और जानकी से बात कराने कि अपील की अगली पार्टी का जवाब मिला जानकी तो अपने ससुराल गया है अपना नाम बता दीजिए वो जैसे ही आएगा हम बता देंगे।
मैने फोन होल्ड किया और अंजली से कहा वो तो अपने ससुराल गया है और मेरा नाम पुछ रहे हैं क्या नाम बता दुं। उसने फोन काट दिया और खुब रोने लगी। पहले तो मै कुछ समझ नही पाया उसे किसी तरह से शांत करके घर तक ले के आया घर में कोई नही थे वो खुब रोने लगी उसके आंसु रुकने के नाम ही नही ले रहे थे और वो मुझसे कुछ कह भी नही पा रही थी मैने उसे पानी पिलाया थोड़ी देर उसे उसके हाल में छोंड कर मै शांत बैठ गया लेकिन वो रोती रही । पहली बार मै अंजली को इतना रोते देख रहा था बात कुछ कुछ तो समझ मे आ गई लेकिन मै कुछ कर नही सका ।
और करता भी तो क्या करता ? वो बार बार भगवान से कहती मेरा प्यार मुझे लौटा दो........
मेरी स्थिती ऐसी थी कि मै उसे न तो अकेला छोंड़ सकता था और नही उसके साथ रह कर दुःख में शामिल हो सकता था। मै आखिर करता तो करता भी क्या? तीन घण्टे तक वो लगातार रोती रही किसी तरह मैने उसे शांत कराया और अपने रुम में आ गया और सोंचता रहा कि आखिर क्यों हुआ अंजली के साथ ऐसा ।
आज दो सप्ताह हो गये हैं लेकिन उसके आंसु नही रुक पा रहे हैं अपने आप को अकेला पा कर वो और भी ज्यादा रोती मुझे देख कर उसे थोड़ा अच्छा लगता था वो हमेशा कहती थी मुझे तुम्हारे आने से कुछ अच्छा लगता है मै अपना दुःख किसी को नही बता पाती हूँ तुम मुझे अच्छे लगते हो तुम्हारी बातें मुझे हिम्मत देती है। तुम्हारे आने से ऐसा लगता है जैसे कोई मेरा दर्द समझ सकता है तो वो तुम हो और शायद वो सही कहती थी अगर मै उस दिन नही होता तो आज शायद अंजली भी नही होती । उसने मुझे अपने और जानकी के बारे में बताया सुन कर बहुत दुःख हुआ मै सोंचने लगा कि आखिर ऐसी क्या घटना घटी होगी जिसके वजह से आज जानकी ने शादी कर ली । या तो वो सिर्फ अंजली के साथ खेल रहा था या कुछ और ...
लेकिन अंजली ने जिस तरह से उसके बारे में बताया जानकी के लिए मेरे मन में नफरत पैदा हो गई और अंजली के लिए मेरे मन में दया कि भावना जाग उठी । समय ऐसा था अगर उसे किसी का सहार नही मिलता तो वह पता नही क्या कर बैठती। मै उस पल को आज भी स्पष्ट याद कर सकता हूँ
आज 21/07/2006 है अंजली और मै मोरनिंग वाक के लिए निकले है मौसम बहुत ही सुहाना है हल्की बारिश हो रही है रास्ते साफ हैं दुर दुर तक कोई भी नही दिख रहे हैं सुनसान सड़क पर सिर्फ हम दोनो ही अपनी धुन में और अपनी बातों में खोए हुए चले जा रहे हैं आगे बढ़ते ही जा रहे है और लगभग हम 7 कि.मी आगे चले आए हैं अंजली ने मुझे पुछा क्या तुम्हे किसी से प्यार नही है मैने कुछ सोंचा फिर बड़ी हिम्मत जुटा कर उससे कहा पसंद तो करता हुँ लेकिन शायद कभी कह नही पाउंगा। अंजली ने कहा नाम बताओ शायद मै कुछ मदद कर सकूं । ये आप के बस की बात नही है मैने कहा। अगर मै तुम्हारा काम करने की कोशिश और पुरा कर लुं तो बताओ मुझे क्या मिलेगा ऐसा कह कर वो हस पड़ी । चलो चलो जलदी से नाम बताओ । आप उसे जानती है आप उसके बहुत ही करीब हैं और आपकी मुलाकात रोज उससे होती है उसने जल्दी से कहा कौन सुहानी.............
मैने कहा नही नही सुहानी नही है मै उसका नाम नही बताउंगा उसकी तस्वीर दिखा सकता हुँ हां अगर आपने उसके साथ मेरा फिक्स करा दिया तो आप जो कहें मै पुरी करने की कोशिश करुँगा और आप नही कर पाये तो बताईये आप मुझे क्या देंगी , मै तुम्हे क्या दे सकती हूँ हां लेकिन तुम अपनी फरमाईश बता सकते हो अंजली का जवाब था, मुझे क्या कोई बड़ी चीज थोड़ी न चाहिए मेरे लिए तो सबसे बड़ी चीज है उसका प्यार पाना और आप नही कर पायेंगे ऐसा तो फिर क्या..... मुझे एक चॉकलेट खिला देना और कहानी खत्म क्यों मंजुर है ? हां मंजुर है तो फिर तस्वीर दिखाओ । तस्वीर तो घर में है आप घर चलिए वहीं दीदार करवाता हूँ मै ।ठीक है चलो ।
और फिर हम घर आ गये, मौसम में कोई परीवर्तन नही आया है हल्की हल्की बारीश हो ही रही है । मैने अपने कपड़े बदले और एक घण्टे बाद अंजली के रुम में गया अपने हांथों को पीछे करते हुए कुछ छिपाते हुए मै उसके पास गया । अंजली ने पुछा क्या है पीछे मुझे नही दिखओगे? मैने कहा आप ही के लिए तो ले कर आ रहा हूँ , वेसे है क्या जिसे तुम छुपा रहे हो , लड़की की तस्वीर.... मैने धीरे से कहा, अंजली की उत्सुक्ता बढ़ गयी और वो मेरे हांथों से उसे छीनने लगी मैने कहा प्यार से देखो मै दिखाता हूँ लेकिन वादा याद है ना नही पटा सके तो चॉकलेट खिलाना पड़ेगा। उसने कहा ठीक है। मैने उसकी आंखें बंद करा दी और धीरे से आंख खोलने के लिए कहा। उसने सामने देखा और फिर  मेरी तरफ देख कर रो पड़ी क्योंकि वो कोई तस्वीर नही थी वो तो एक आईना था और उस आईने में अपनी ही प्रतिबिम्ब को देख कर वो बहुत ही दुःखी हो गयी रोते हुए कहा उसने ,मै तुम्हें प्यार नही दे पाउंगी । तुम तो सब कुछ जानते हुए भी .....वह कहते कहते रुक गयी । मैने कहा अंजली मै तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ जिन्दगी भर के लिए मै तुम्हे अच्छी तरह से जानता हूँ इसीलिए तो मै तुमसे प्यार करता हूँ और वैसे भी तुम्मे मुझे कोई बुराई नजर नही आती जो होना था सो तो हो ही गया । और मै चाहता हूँ कि तुम अपना बिता हुआ कल भुल जाओ और एक नये जीवन की शुरुआत करो । मेरी जो सोंच थी मैने तुम्हारे सामने रख दिया है अगर मुझमें कोई बुरी आदत या फिर कोई और ऐसी खराबी जो तुम्हारी  नजर में है तो प्लीज मुझे बताओ ताकी मै उसे दूर कर सकुं । अंजली ने रोते हुए मुझे कहा तुम तो बहुत ही अच्छे हो तुमसे मुझे कोई परेशानी या कोई शिकायत नही है लेकिन मै तुम्हारे लायक नही हूँ तुम्हें मुझसे बहुत ही अच्छी लड़की मिल जाएगी । और तुम तो मेरे बीते हुए कल को अच्छी तरह से जानते हो ।
मैने कहा अंजली मेरा रिश्ता तुम्हारे बीते कल से नही आने वाले कल से है । अंजली ने कहा शायद मै तुम्हे प्यार नही दे पाउंगी । और वो रोते हुए खड़ी रही । मुझे भी अच्छा नही लगा । ऐसा लगा जैसे कि मुझे ऐसा नही कहना चाहीए था उसके मन को शायद मै समझ नही सका मेरी वजह से उसकी पुरानी यादें ताजा हो गई। मैन कहा कोई बात नही वादा याद है ना । रोना मत और मुझे चॉक्लेट खिलाना ओके । मै बाहर आंगन मे आ गया बारीश तेज हो गई है जोरों कि बिजली चमक रही है मै आंगन में खड़ा हूँ अंजली खिड़की से रोते हुए मुझे देख रही है 1/2 घण्टे तक मैं भीगता रहा अंजली ने अपनी छतरी खोली और मेरे पास आकर मुझे कहने लगी तुम ऐसा क्यों कर रहे हो , क्या समझते हो अपने आप को किसी फिल्म के हिरो हो क्या तुम इतनी बिजली कड़क रही है और तुम पागलों की तरह यहां खडे़ हो कर तमाशा बन रहे हो नानी भी क्या सोंच रही होगी चलो आओ ईधर। और मै अपने घर के गलीयारे में चला गया वो मेरे पास आई और फिर अपनी बाहों में  मुझे भर कर खुब रोने लगी । मेरे लिये तुम क्यों ऐसा कर रहे हो क्या मेरी सच्चाइ्र जानने के बाद भी मै तुम्हारे लायक अपने आप को कभी बना पाउंगी; और भी बहुत सी बातें हुई हमारे बीच जिसे मै आप लोगों को नही कह सकता वो बुरी बातें नही थी बस आप इतना समझिये कि ऐसी बातों को दिल में रखा जाता है ये मेरी जिन्दगी की सबसे बड़ी घटना थी
आखिर अंजली ने मेरे प्यार को स्वीकार कर लिया।
हम दोनो बहुत ही खुश रहते थे साथ साथ उठना बैठना घुमना फिरना।सच में बहुत ही यादगार पल थे वो ऐसा लगता था मानो हम लोगों के लिए समय कम हो जाता है दिनभर साथ रहने के बाद जब हम सोने के लिए अपने अपने रुम मे जाते तो ऐसा लगता था कि कैसे ये रात कटे और सुबह आए। यही सिलसिला चलता रहा । अंजली और मेरे रिश्ते के बारे में मेरे घरवालों को भनक लग चुकी है और अब घर वाले चाहते हैं कि किसी तरह से उन्हें मकान खाली करने के लिए बोल दें। लेकिन कहें भी तो कैसे इनके बड़े भाई बहनों के साथ इतना पुराना संबंध था और बात व्यवहार में कोई कमी भी नही थी मेरे घरवाले कुछ कह नही पाए।
उसी समय अंजली और मै जी.डी.(पुलिस) की तैयारी कर रहे थे वैसे ये हमारा खास मख्सद नही था लेकिन हमे अच्छा लगता था तैयारी जोर शोर पर थी और हम दोनो को अपने आप पर पुरा भरोसा भी था जब हम शारीरिक मानदण्ड के लिए गये तो मै तो पहले ही राउंड में बाहर हो गया अंजली को आगे जाने का मौका मिल गया वो बहुत खुश थी और मेरी असफलता पर उसे दुःख भी था उसने मुझे बहुत प्रोत्साहीत किया और मुझे अगली बार के लिए हिम्मत दिखाया । लिखित परीक्षा में भी वह अच्छे नंबर से पास हो गई। और अब उसे काउंसलिंग में जाना था लेकिन उसकी ओरिजिनल मार्कशिट सरगुजा जिले में थी क्योंकि शिक्षिका के पद के लिए उसने वहां भी अप्लाय किया था और उसमें जहां तक हो ही गया था अंजली को कल सुबह 10 बजे किसी अधिकारी के समक्ष अपने सभी कागजात के साथ पेश होना है और वो बहुत ही चिन्तीत है वो मेरा साथ मांग रही है लेकिन मै आज से पहले इतनी दुर कभी नही गया हुँ मेरे पिताजी तो वैसे भी हमारी दोस्ती को नामंजूर ही कर रहे हैं इसलिए मै उनसे इजाजत भी नही मांग सकता। मैने किसी तरह से अंजली को समझाया और अपने पिताजी के पास उसे भेज दिया
मैने सोंचा था कि शायाद अंजली के कहने से मेरे पिताजी बात को काट नही पाएंगे और मुझे जाने कि परमिशन दे देंगे। लेकिन ऐसा नही हुआ पिताजी ने साफ मना कर दिया । और मै उसका साथ नही दे सका । मैने अपने एक दोस्त को जो गाड़ी चलाता था उससे बात कि उसने 2000 रु कह कर हमारी बोलती ही बंद कर दी। वो किसी तरह अपने एक दुर के रिश्तेदार के साथ वहां तक गई और अपनी सभी आवश्यक चीजें ले कर आ गई मुझे अपने आप पर शर्म आन लगी थी सोंच रहा था कि अब मै अंजली के सामने क्या मुह लेकर जाउंगा। लेकिन वो मेरी मजबुरी समझ सकती थी उसने कभी भी मुझे इसका एहसास नही होने दिया ।
अगली सुबह वह तैयार हो कर जाने लगी मैने साथ जाने का फैसला किया और हम दोनो सांथ मे ही गये। 4 घण्टे तक कतार मे खड़े रहने के बाद किसी तरह से हमें वहां से मुक्ति मिली और हम घर आ गये। लेकिन इस बार अंजली कि किस्मत ने भी उसे धोखा दे दिया । उसका नाम चयन सूची में नही आया । लेकिन वो हताश नही है ।
कुछ दिनो के बाद उसे स्कॉलरशिप मिली इस बार भी हम दोनों साथ में ही हैं। पहले तो हम दोनों ने एक एक बववसकतपदा ली और बाकी के समानों को पैक करा के दो नदीयों के संगम मे गये जहां अकसर मै अपने पिताजी के साथ जाया करता था
नदी के बीचों बीच एक बड़ा सा पत्थर है जहां से देखने पर नदी की सुन्दरता देखते ही बनती है हम दोनो उसी पत्थर पर काफी देर तक बैठे समझो
 एक तरह से ये हमारी जिन्दगी की पहली पिकनीक थी लगभग 5 घण्टे के बाद हम दोनो को एक ही आकार के दो पत्थर मिले जिनमें कोई अन्तर नही था उसका रंग लाल और आकार.. दिल के जैसा था। आपको लग रहा होगा कि मै या तो झुठ लिख रहा हूँ या फिर............................................................... खैर ये आपकी सोंच है मुझे इससे फर्क नही पड़ेगा
ल्ेकिन आपको मेरी बातों पर यकिन करना चाहीए । और मेरी कहानी के अंत को जानना चाहीए । मै आपसे जिद नही कर रहा हूँ अगर मेरी बातों में कोई सच्चाई नजर आ रही हो तो आप आगे पढ़ सकते हैं इसे लिखना मेरा संकल्प है इसलिए मै तो इसे पूरा करने के बाद ही आराम कर सकता हूँ।
 मै कोई मुंशीप्रेमचंद तो नही हुँ लेकिन अपने से जो कुछ लिख रहा हूँ ये कोई बनावटी कहानी नही है और आप लोगों के मनोरंजन के लिए मै इसे बनावटी भी नही बना सकता ।
हमने एक दूसरे से पत्थर बदले और वादा किया कि इसे हम एक दूसरे का दिल समझ कर हमेशा अपने पास रखेंगें अगर कभी अलग हो भी गये तो इसे देख कर एक दुसरे को हमेशा याद करेंगें और इस पल को कभी भी नही भुलाएंगे। शाम होने वाली है और सुर्य भी पहाड़ के आड़ मे जा छुपा है लेकिन उसकी रोशनी अभी भी बाकी है हम लोग नदी से बाहर निकल कर अपनी सायकल तक पहुंच चुके हैंे  वहां जा कर मैने अंजली को नदी कि ओर देखने का इशारा किया और उसने जैसे ही अपना चेहरा नदी की ओर घूमाया उसकी खुशी का ठिकाना न रहा वह अपनी खुशी जाहीर नही कर पा रही थी और खुशी से इतनी पागल हो गई कि उसने मुझे वही गले से लगा लिया । जब अंजली मेरे लिए पत्थर ढुंढ रही थी तभी मै एक बड़े से पत्थर पर उसका नाम लिख रहा था उसे इस बात का पता भी नही लगने दिया था मैने क्योंकि मै उसे दूर से दिखाना चाहता था और ऐसा ही हुआ जैसा मैने सोंचा था मै भी काफी खुश था अंजली की खुशी ने मेरी खुशी को दुगुना कर दिया ।
शाम ढलते ढलते हम घर पहुंच गये ।
अंजली जानती थी कि अब हमारी जुदाई के दिन करीब आने ही वाले थे इसलिए उसने अपने पैसे से मेरे लिए एक मोबाईल खरीदा और मुझे दिया मैने इन्कार नही किया। क्योंकि मुझे लगा कि अब जब हम दूर होने वाले हैं तो यही एक सहारा है जो हमारी दूरी को नजदीक में तबदील कर सकती है।
अब अंजली जाने वाली है और पता नही हम फिर कब मिल पायंेगे सोंचकर ही मन में घबराहट और बेचैनी सी होने लगती है बस एक सप्ताह ही हमारे पास है  और मै चाहता हूँ की इस एक सप्ताह को उसकी जिन्दगी कि सबसे यादगार पल बना दुँ। लेकिन मेरे पिताजी को आज कि घटना मालूम हो गई है फिर भी वो आंगन में शांत बैठकर कुछ सोंच रहे हैं और मै अपने कमरे मंे रो रहा हूँ रातभर नींद नही आई । किसी तरह से रात बीत चुकी है मंेरे पिताजी ने उन्हे रुम खाली करने को कह दिया यह बात सुनकर मेरी तकलिफ शायद ही आप समझ पाऐंगें । उन्हे समय दे दिया गया है ।
दोनों बहने बहुत ही निराश हैं लेकिन करें भी तो क्या ? अगले ही दिन दोनों बहनें मकान ढ़ूढने निकल पड़ी। मेरे घर से लगभग 5 कि.मी की दुरी में उन्हे मकान मिल गया है शाम होते होते वे रुम छोंड़ने का फैसला कर चुकी हैं मै घर में नही था किसी काम से बाहर गया था आते ही मैने देखा कि वे अपना समान बांध चुकी हैं और जाने कि तैयारी पुरी हो चुकी है मै उसे अपने आंखों के सामने जाते हुए नही देख सकता था इसलिए मै अपने कमरे में चला गया थोड़ी देर बाद अंजली मेरे कमरे में आई और मुझे समझाने लगी कहने लगी ये तो एक दिन होना ही था अपने आप पर भरोसा रखो और वेसे भी हम दोनो दिल से दुर तो नही हो रहे हैं। और कहते कहते वो रो पड़ी मैने उसे सीने से लगा लिया एक दुसरे से काफी देर तक लिपट कर हम दोनों रोते रहे। आंसू रुकने का नाम ही नही ले रहे थे। मैने उनके जाने का समय पुछा वो कुछ भी नही कह पाई । मुझे लगा कि अभी दो तीन घण्टे का समय तो होगा ही। अंजली अपने कमरे में चली गई और मै बाहर निकल गया। जब आधे घण्टे बाद मै वापस आ ही रहा था तब मैने देखा कि अंजली और अंजु अपने पुरे सामान के साथ गाड़ी में बैठ चुके हैं अंजली ने दुर से आवाज लगाकर मुझे कहा  सायकल लेकर आओ..........
और मै अपनी सायकल लेकर उनके बताए हुए पते पर पहुंच गया । सायकल कहां है अंजली ने पुछा मैने कहा ये रही मेरी सायकल वो मुस्कुराते हुए बोली पागल मेरी सायकल लेकर आओ मैने कहा था और तुम तो अपनी सायकल में ही आ गए सामान ज्यादा था इसलिए गाड़ी में लोड करते नही बना। सोंचा तुम लेकर आओगे खैर कोई बात नही अन्दर आओ देखो हमारा कमरा मै तो नही रहूंगी अंजु रहेगी। कभी कभी मिलने आते रहना। उसकी बातों में बहुत ही ज्यादा मन को प्रभावित करने वाले शब्द थे जिसमे करुणा और स्नेह साफ साफ नजर आ रहे थे मै उसके भावनाओं की कद्र करता हुं और उसकी बातों को अच्छी तरह से समझ सकता हुँ उसकी वो रुवाशें भरी आंखें मुझे आज भी याद है हमने साथ मिलकर सामान उतारे और उन्हें जमाने लगे तभी अंजु ने कहा जाओ अंजली जा कर सायकल को भी ले ही आओ क्योंकि उसकी जरुरत पड़ती ही रहेगी। इसके अलावा कोई साधन भी तो नही हैं अंजली ने हामी भरते हुए कहा जाउंगी लेकिन बहुत थक गई हुं थोडा आराम कर लेती हुं कुछ देर बाद चली जाउगी, और हम तीनों अंजु, अंजली और मै बातें करने लगे। कुछ देर बैठने के बाद अंजली और मै मेरे घर जा रहे हैं उनकी सायकल लेने, रास्ते में हम एक दुसरे कि नम आंखों को थोड़ी राहत देने कि कोशिश करते लेकिन नही कर पाते, मन बिल्कुल भी नही मान रहा है कि आखिर ऐसा क्यों और किसलिए हो रहा है अगर हम एक दुसरे के साथ खुश हैं तो इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है हम किसी से कुछ मांग तो नही रहे हैं या किसी को नुकसान तो नही पहुंचा रहे हैं , ऐसे अनेको सवाल मन में उठ रहे हैं और बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है दिल में ...............
हम दोनों मेरे घर आ गये हैं और उस कमरे में जा रहे हैं जहां अकसर हम दोनो साथ में बैठकर बातें करते थे हंसते थे रोते थंे और बहुत कुछ...
अब शाम होने वाली है अंजली ने अपनी सायकल पकड़ी और जाने लगी मै उसे कुछ दुर तक छोंड़ने का फैसला किया और वो राजि हो गई क्योंकि वो भी वही महसूस कर रही थी जो मै कर रहा था। और हम निकल गये ।
मै उससे बातें करते करते उसके घर तक छोंड़ आया लेकिन वो अन्दर नही जाना चाहती है मुझे इस तरह से छोंड़ कर जाना उसे अच्छा नही लग रहा है हम दोनो बहुत ही ज्यादा दुःखी हैं अगर आप कभी ऐसी स्थ्तिी में हों जहां से आपको लौटना भी सही नही लगता और रुकना भी तब शायद आप मेरी स्थिती को जान सकते हैं अंजली रो रही हैं वो अपना दर्द बता सकती है लेकिन मै नही क्योंकि अगर मै रो पड़ा तो शायद पता नही क्या हो जाएगा। यही सोंच कर मै अपने आप को रोक रहा हुं।
मै उसकी ओर बिना देखे ही लौट रहा हुं और वो खड़ी हो कर एकटक मेरी ओर ही देख रही है मानो उसकी आंखें कह रही हो एक बार तो मुड़ कर आ जाओ लेकिन मै अपने मन को कठोर करते हुए लौट रहा हुं आर अंजली के अन्दर जाने का इन्तजार कर रहा हंु
लेकिन वो अन्दर नही गई और मेरी ओर देखती रही, मुझसे भी रहा न गया और मै अपनी सायकल उसकी ओर घुमा कर उसके पास आ गया उसे अपने सीने से लगा कर कुछ देर तक मै भी रोता रहा मै अपने आप से हार गया और अपने आप को रोक न सका, अंजली ने कहा चलो मै तुम्हे कुछ दुर तक छोंड़ कर आउंगी मुझे अच्छा लगेगा। मै जानता था कि यही सिलसिला चलता रहेगा क्योंकि इतने दिनों का साथ ऐसे कैसे छुट जाएगा। और वो मुझे कुछ दुर कुछ दुर कहते मेरे मोहल्ले तक आ गई , रात हो चुकी है उसे बहुत मनाने के बाद फिर मै उसे कुछ दुर तक छोंड़ने जा रहा हुं और इस बार उसे मै मना ही लंुगा यही सोंच रहा हुं बीच में ही मैने उसे जाने के लिए कहा और अपने घर की ओर लौट कर आ गया । लेकिन मै घर नही पहुंचा हुं नदी से उपर मेरा मोहल्ला है और नदी के पुल में आकर मै बैठा हुं सोंच रहा हुं कि वो घर जा रही होगी या नही क्या वो अभी भी रो ही रही होगी । मेरे भी आंसु रुकने का नाम नही ले रहे हैं रात के अंधेरे में मेरे आंसुओं को बाहर आने में कोई तकलीफ नही हो रही है। 30 मीनट हो चुके हैं और मै नदी में ही बैठा हुं सोंच रहा हुं अब तक तो वो अपने नये घर तक पहुंच ही गई होगी । लेकिन मै गलत था उसका भी वही हाल था जो मेरे मन का था। अचानक मेरा मोबाईल बज उठा। ये किसी एस.टी.डी का नंबर है मैने फोन उठाया और अंजली रो रो कर कह रही थी लौट आओ....... लौट आओ....... मुझे अकेला मत छोंड़ो मै तुम्हारे बीना नही रह पाउंगी। और मै भी अपने आप को नही रोक सका । ना समय देखा और ना ही हालात मै सीधा उसके पास जा पहुंचा लोगो की भीड़ लगी थी लोग उससे पुछ रहे थे तुम कौन हो और क्यों रो रही हो? तुम्हे कहां जाना है कहां से आई हो और वो रोती ही जा रही थी। जैसे ही मै वहां पहुंचा उसने कुछ भी नही कहा और सीधे मेरी बाहों में आ कर रोने लगी। लोग देख रहेे थे आखिर क्या हो रहा है ये लोग कौन हैं और ना जाने उनकी तमाम बातें , मेरी तो कुछ भी समझ में नही आ रहा था
तभी भीड़ से एक सज्जन व्यक्ति निकल कर आया उसने हम दोनों को बैठने के लिए कुर्सी दिया और पानी की बोतल मेरे हांथ में थमाते हुए मुझे ईशारे से कह रहा हैं कि उसे पानी पिला दो।मैने अंजली को पानी पिलाया और लोगों केा धन्यवाद देते हुए कह रहा हुं कि आप लोगों की बहुत मेहरबानीे है कि आप लोगों ने इसे संभाला, और अब सब कुछ ठीक है मै इसका ध्यान रखुंगा आप लोग अगर जाना चाहें तो जा सकते हैं।लोगों कि भीड़ चली गई । किसी को हमसे कोई शिकायत नही है। थोडी देर बैठने के बाद मैने अंजली की पीठ पर हांथ रख कर उसे कहा अब मै आ गया हुं मत रो....
मै तुम्हे छोंड़ कर कभी नही जाउंगा। ये मेरा वादा है किसी तरह से उसके आंसुओं कों पोंछते हुए मै उसे उनके नये घर तक पहुचाने के लिए फिर से चल पड़ा । रात के 11 बज चुके हैं और मै काफी थक सा गया हुं अंजु दीदी मुझे देख कर काफी नाराज है सोच रही है वो मुझसे कैसे कहे। ये मेरा ख्याल है, मुझे भी हालात पता है इसीलिए मै घर जाना चाह रहा हुं लेकिन अंजली की स्थिती देख कर मै उसे अकेला नही छोंडना चाह रहा हंु रो रो कर उसकी आंखों में सुजन सी आ गई है और मै ये भी जानता हुं कि अगर मै यहां से चला गया तो वो खाना भी नही खाएगी और बस रोते रोते ही सो जाएगी । इसलिए मै उसके पास बैठ कर उसे खाना खिला कर लौैट जाना चाहता हुं । हम दोनों ने साथ बैठके खाना खाया और मै अपने घर के लिए निकल रहा हु लेकिन नये मालिको के घर के कुछ नियम कानून हैं 12 बजे के बाद वहां कोई आ जा नही सकते। बाहरी दरवाजे पर एक बड़ा सा ताला जड़ दिया गया है। जिसकी वजह से आज रात मुझे न चाह कर भी यहां गुजारना पड़ेगा । सुबह ना जाने कितने प्रश्न उठेंगे मै नही जानता । किसी तरह आज की रात भी कट गई । और मै घर लौट रहा हुं अंजली मुझे जाते देख कर अपने आंसुु रोक नही पा रही है । अंजु दीदी सब कुछ जानती है इसलिए वो हमें अकेला छोंड़कर अपना काम कर रही है। मैने अंजली को समझाया की इस तरह रोने से कुछ नही होगा । अपने ज्जबातों पर काबु रखना सीखो तुम हिम्मत हार जाओगी तो मेरा क्या होगा। वो शांत हो गई और मै अपने घर की ओर चल पड़ा।
घर मे घुसते ही मेरा सामना मेरे पिता जी से हुआ। और उनका पहला सवाल था मेरे लिए रातभर तुम कहां थे मै कुछ कह न सका । क्योंकि मै जानता था कि वो सब कुछ जानते हुए भी ये प्रश्न मुझसे पुछरहे है और इसका जवाब मुझे देने में कोई रुची नही है क्योंकि उनकी शक की बीमारी मुझे पसंद नही है उन्हे तो बस यही लग रहा होगा कि मै रात भर किसी लड़की के साथ मौज मस्ती कर रहा था उन्हे क्या पता कि रातभर हम लोग किस हालात में थे। आपने तो एक झटके में उन्हे मकान खाली करने का फरमान जारी कर दिया अपने बेटे की खुशी आपसे देखी नही गई । ( मै उनकी ज्यादा बुराई भी नही कर सकता क्योंकि वो मेरे पिता हैं फिर भी आप अगर थोड़ा सा हालात को समझने कि शक्ति रखते हैं तोएक बार अपने आप से  ये पुछिए कि क्या आपने सही किया। लेकिन आप शायद कभी समझ ही नही पाएंगे मेरी भावनाओं को)
मै बीना कुछ कहे ही अंजली के कमरे में चला गया और उसे महसूस कर रहा हुं एक- एक बात याद आ रही है जो तुम और मै साथ बैठ कर किया करते थे। बहुत तकलीफ हो रही है लेकिन करुं भी तो क्या ।
दोपहर हो गई है और मै तुम्हे बहुत मिस कर रहा हुं मिलने का मन भी कर रहा है सोंच रहा हुं कि तुम्हारे पास चला जाउं लेकिन हालात अब ऐसे नही रहे(पहले की तरह) कि जब चाहुं तुमसे मिल सकु। फिर भी मैं अपने आप को रोक न सका और तुमसे मिलने के लिए जा ही पहुंचा। और मिलने के बाद मै पहले से काफी अच्छा महसूस कर रहा हुं
जब जब हम मिल रहे है एक दुसरे के मन को और अच्छे से समझने लगे हैं भगवान से हमेशा प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर हमें कभी अलग मत करना वरना हम दोनो शायद एक दुसरे के बीना जी नही सकेंगे। जब मै उसके पास से जाने लगता वो फूट-फूट कर रोने लगती और मै बेचैन सा हो जाता क्या करे मोहब्बत पागलपन का दूसरा रुप होता है ये सही है और इसी पागलपन के हम दोनो सबसे ज्यादा बिमार हैं। कुछ दिनों के बाद अंजली को जाना था ऐ बात भी सोंचकर मै काफी परेशान हुं और मै चाहता हुं कि उसे इतने कम समय में जितनी ज्यादा खुशी दे सकुं  शायद कम है किसी तरह से वो अपने पैरों पर खड़ी होने जा रही है इसलिए मै उसे रोक भी नही सकता। और वो अपने पैरों पर उठ जायेगी तो सबसे ज्यादा खुशी तो मुझे ही होगी।
(चार दिन बाद)
आज अंजली जा रही है मै उसे बस स्टेैन्ड तक छोड़ने आया हुं अंजू दीदी भी साथ में हैं अंजली और मेरा चेहरा उतरा हुआ है गाड़ी छुटने ही वाली है और हमारे दिल की धड़कन तेज हो रही है हम अपने आंसुओं को रोक नही पा रहे हैं लेकिन ऐसी जगह में रोना भी ठीक नही है और वैसे भी अंजू क्या सोंचेगी। मै अपने आप से बार बार कह रहा हुं कि किसी तरह से अपने जज्बातों पर कंटरोल करना होगा और अंजली को हंसते हंसाते यहां से विदा करना होगा। उसके आंखों में आंसु की एक बंूद भी नही आनी चाहीए उसने पहले ही बहुत कुद खोया है और अपने आंसू भी बहुत बहा चुकी है तो क्यों न इस बार उसे हंसता हुआ देख लुं और वैसे भी मुलाकात तो फिर होगी ही,
एक बार जब अजली बोदा गई थी  तो उसके साथ जो घटना हुई थी मै उससे बहुत डरता हुं और हमेशा मन मे एक भय बना रहता है आप सोंच रहे होंगे की क्या हुआ था उसके साथ तो मै आपको बताता हुं।
अंजली और उसकी बहन गुड्डी (मेरी सिसलिया) जिसके साथ अंजली रहती थी । अंजली को छोंड़कर किसी काम से अपने घर आई थी उसी बीच अंजली के कमरे में रात को एक अज्ञात व्यक्ति घुस गया था उसके हाथ में एक बंदूक थी अंजली एक 10 साल की बच्ची के साथ सोई थी तभी उसे किसी की आहट सुनाई दी ये आवाज उसके कमरे की उपरी छोर से आ रही थी कोई उसके कमरे में छत के रास्ते घुसने की कोशिश कर रहा था वो कुछ समझ नही सकी और कहते हैं न की मुश्किल समय में दिमाग की बत्तीयां कमजोर हो जाती हैं लेकिन अंजली  ने हिम्मत से काम लिया उसने अपने घर के सभी लाईट और रोशनी वाले सभी चिजें बंद कर दी। लेकिन वो आदमी अंदर आ ही गया और वह बहुत नशे में था लेकिन उसे मालूम था कि कौन सी चिज कहां है उसने लाईट चालू किया और सीधे अंजली की ओर बढ़ा उसने अंजली के सर पे अपनी बंदूक अड़ा दी। अंजली बहुत डर गई और उसने उसने उससे सिर्फ इतना ही कहा भैया मै आपकी छोटी बहन हुं और आप ऐसे हमें क्यों सता रहे हैं हमारी क्या गलती है उसके चेहरे पर एक तौलिया था जिसकी वजह से उसका चेहरा नजर नही आ रहा था लेकिन अंजली उसे लगभग पहचान गई थी और उसका कमरे में आने का जो तरीका था वो कोर्इ्र अजनबी नही कर सकता था जो उस कमरे से वाकिफ था सिर्फ वही ऐसा कर सकता था उसी बीच उस 10 साल की बच्ची ने रोना शुरू कर दिया उसके रोने की आवाज सुन कर पास के ही घर में सो रहे अंकल आंटी  दौड़ कर चले आये उन्हे आता जानकर वो दौड़ कर बाहर की ओर निकल गया। अंजली के साथ उस रात कुछ भी हो सकता था लेकिन क्यों कुछ नही हुआ ये बात आपको परेशान कर रही होगी जब उसके हाथ में बंदूक थी फिर उसे भागने की क्या जरूरत थी दरसल हमें भी ये बात बाद में पता चली की वो कौन था अंजली को शक तो पहले से ही हो गया था लेकिन शक के आधार पर सीधे किसी पर उंगली कैसे उठा सकते हैं वो लड़का कोई और नही उस मकान मालिक का बेटा था जिस में वो किराये में रहती थी और अंजली के साथ जो 10 साल की बच्ची सोई थी वो कोई और नही उसकी छोटी बहन थी जिसके कारण वो कुछ कर पाने की हिम्मत जुटा न सका।
वह डर गया की कहीं कोई उसे पहचान न ले और इस डर से वह वहां से भाग गया। रात भर पडो़सी उसके साथ रहे और अंकल आंटी भी वहीं बैठकर देखने लगे की शायद वो वापस आएगा क्योंकि उसकी बंदूक अभी भी उसके कमरे में छुटी हुई है। लेकिन वो नही आया। सुबह होते ही उसने मुझे फोन किया और यहां आने के लिए कहा मुझे उसने फोन में कुछ नही बताया और मै निकल गया । वहां जाने पर मुझे पता चला की ऐसे लोग यहां रहते हैं और मै पागल सा हो गया ऐसा लग रहा था बस एक बार उसका पता चल जाये साले की हालत खराब कर दुं गुडडी मुझसे पहले आ गई थी मैन उसी पर अपना गुस्सा उतार दिया।
आपको तो पता है न कि दुनिया कैसी है और एक अजनबी गांव में आप अपनी छोटी बहन को अकेले छोंड़ कर चली गई आप का ऐसा कौन सा जरूरी काम था की आप अंजली को ऐसे बिरान गांव में छोंड़ कर जा सकती हैं मै मानता हुं उस समय मेरा दिमाग खाब था मै गुस्से में था किसी और का गुस्सा किसी और पर उतार रहा था लेकिन गतल भी नही कह रहा था क्योंकि गुडडी बहुत पहले से यहां रह रही है तो उसे मालूम होना चाहिए कि आस पास का माहौल कैसा है खैर इन बातों को छोंड़ीए अंजली सलामत थी इससे खुशी की बात और क्या हो सकती थी मैने और अंजली ने रूम खाली करने का फैसला ले लिया और एक नर्स के घर में उन्हे सिफ्ट करा के दो-चार दिन उनके साथ रह कर मै वापस आने लगा फिर मैने देखा कि गुडडी हमसे पहले घर जाने के लिए निकल गई मै और अंजली अकेले थे मै चाहता था कि अपने घर जल्दी से जल्दी चला जाउं क्योंकि मैने किसी को बीना सूचना दिये ही 5 दिन बाहर बिता दिये हैं अंजली और मै तैयार हो कर अपने अपने घर जाने के लिए निकल गये बस स्टैण्ड पर जाकर दोनों को अलग होना था क्योंकि हमारी बसें विपरित दिशाओं में जाती थी फिर मैने सोंचा की अंजली को उसके घर तक छोंड़ कर आना चाहिए और वहां से भी मै अपने घर जा सकता हुं मैन अंजली के साथ जाने का फैसला लिया इसके पहले मै कभी भी अंजली के घर तक नही गया था और सही बात कहुं तो उसके घर को देखने की इच्छा भी थी हम दोना गाड़ी से उसके घर के लिए निकल गये बातें करते करते हम कुनकुरी तक आ गये पहले तो मै डर रहा था कि उसके घर वाले जब मुझसे कहेंगे कि कैसे आना हुआ तो मै क्या कहुंगा लेकिन कहना क्या था जो भी होगा पहले से कहा नही जा सकता रात के 8 बजे हैं अंजली को उसके घर तक छोंड़ दुंगा और फिर रायगढ़ वाली गाड़ी पकड़ कर सुबह 4-5  बजे तक अपने घर भी पहुंच जाउंगा मेरी प्लानिंग हो चुकी थी मैे उसके पहले वाले घर में गया जहां ताला लगा
था सभी दूसरे घर में थे जो 02 कि.मी की दूरी पर है हम भी वहीें के लिए निकल गये और वहां जाकर मै बाहर आंगन में खड़ा हो गया अंजली ने अंदर आने के लिए कहा लेकिन मै हिचक रहा था कि कैसे जाउं तभी उसकी मां ने अंदर आने के के लिए कहा तो कुछ हिम्मत हुई क्योंकि मै जान रहा था कि गुडडी ने हमारे बारे में कुछ तो कहा ही होगा और इसी लिए वो हमसे पहले यहां आई है चाय और नास्ता मुझेे दिया गया लेकिन मेरा मनन ही कर रहा था उसकी सभीी बहनें वहीं खड़ी होकर मुझे ऐसे नजर से देख रही थी मानों मैेने उनका कुछ बीगाड़ दिया हो मां और बाबा को छोंड़ कर सभी का रूखा व्यवहार मुझे बहुत खराब लग रहा था मैने कहा ठीक है अंजली अब मुझे चलाना होगा गाड़ी का समय भी हो गया है तो मै निकलता हुं किसी ने मुझे कुछ नही कहा अंजली ने कहा अभी क्यों जाओगे सुबह चले जाना उसकी मां ने एक बार ही कहा तभी फबी ने कहा की अभी गाडी है या नही  मैने बीना सोंचे ही कह दिया है मैने पता कर लिया है सुबह तक पहुंच जाउंगा और वैसे भी मेरा बहुत सा काम बाकी है जिसे पूरा भी करना है। और मै इतना कह कर निकलने लगा अंजली ने रोते रोते अपनी मां से कहा मां रोक ना उनको अभी मत जाने दो मां ने कहा बोल तो सकती हु काम है कह रहा है तो मै कैसे कहुं वो बहुत ही ज्यादा रोने लगी मैने अपने मन को कठोर किया और फबी के साथ बैठ कर बस स्टैण्ड तक आ गया मैन गाड़ी रोकने के लिये कहा तो फबी ने सीधे बस स्टेण्ड के अंदर ही घुसा दी मै समझ गया की ये मुझे गाड़ी में जाते देखना चाहते हैं चलो इनकी ये ख्वाहिश भी पूरी कर ही देते हैं मैन रायगढ़ वाली गाड़ी के कंडक्टर से पुछा इस गाड़ी के छुटने का समय क्या है सुबह 3 बजे, इससे पहले आपको रायगढ़ के लिए कोई गाड़ी नही मिल सकती । घर जाईये आराम से आईयेगा। और मै निराश हो गया लेकिन मैने फबी और गुडडी को जाने के लिये कह दिया लेकिन वो कहां मानने वालीं थी ज्यादा कछ नही कहुंगा क्योंकि आज की रात मैन उन्ही के घर में बिताया अंजली 2 कि.मी दूर थी और मै उनके पहले वाले घर में था मेरा मोबाईल भी बैटरी कम होने के कारण बंद हो गया था इस लिए मजबूर होकर फबी का मोबाईल मांगना पड़ा मैने अंजली को फोन किया और बताया की मै नही गया हुं अब मत रो सुबह मिलंुगा।
रातभर सोंचता रहा की प्यार में क्या कुछ नही करना पड़ता कभी मैने नहीं सोंचा था कि हमारी वजह से किसी को खराब लगेगा और खास कर उन्हें जिन्हें मै बचपन से जानता और उन्की ईजजत करता आया हुं मुझे अपने आप पर भी गुस्सा आ रहा था लेकिन क्या करता और समय भी तो मेरा ही बनाया हुआ है
किसी तरह रात कटी और मैने फबी दीदी से कहा एकबार मै अंजली से मिलना चाहंूगा फिर किसी गाड़ी से चला जाउंगा मै जनता था उनके पास मेरे सवाल का कोई जवाब नही होगा मै उम्मीद भी नही करता, मै मोरनिंग वाक करते करते आ ही रहा था कि पिछे से गुडडी आई कुछ कुछ कह रही थी लेकिन मै अपने में ही था क्योंकि वो जो कहेगी मेरे मन को उससे कोई खुशी तो होगी ही नही और बात को आगे बढाकर क्या फायदा आज जाना ही है तो क्यों किसी का दिल दुखाना, मै अंजली के पास पहुंच गया वो मुझे देखकर बहुत ही ज्यादा खुश हुई उसकी खुशी के लिए मै अपने आप को किसी भी हद तक ले जा सकता था और शायद इसी कारण मै इतना सब कुछ बर्दाशत कर रहा हुं। थोडी देर बाद घर के सभी लोग अपने अपने काम से चले गये रह गये तो सिर्फ हम दोनों और अंजु दीदी ,मुझे इनसे कभी कोई शिकायत नही थी और आज भी नही है । हमने साथ मिलकर नाश्ता किया और मै जाने के लिए तैयार होने लगा तभी अंजली ने अपने दूसरे घर चलने को कहा मैने कहा चलो और हम दोनो सायकल से उनके दूसरे घर के लिए निकल गये वहां फबी रहती है उसके लिए कमरा बन रहा है जिसका काम अभी भी जारी है हम दोनों ने मिलकर लगभग 7 घण्टे तक बहुत ही कठोर मेहनत की जिससे मेरा शरीर जवाब देने लगा लेकिन करना था नही करता तो न जाने ये लोग मेरे बारे में क्या क्या नही कहेंगे उन्हें तो मेरी एक गलती दिखनी चाहिए बस मौका मिलने की देर है जो मै उन्हे कभी नही देना चाहुंगा और ऐसा ही हुआ उन्हे शिकायत का कोई मौका नही मिला लेकिन मै बूरी तरह से थक गया था ऐसा लग रहा था की काश कोई मेरे पूरे बदन पर रोलर चला दे तो राहत मिल जाये।।
और आज ऐसी हालत में न तो मै घर आ सकता था और न ही कुछ कर सकता था अंजली मेरी परेशानी समझ रही थी इसीलिए मुझे आज की रात भी यहीं बितानी होगी।
अगली सुबह मै अपने घर के लिए रवाना होने लगा तो अंजली मेरे साथ बस स्टॉप तक आई और आज संडे भी है इंडिया का सबसे बड़ा चर्च भी यहीं है और अंजली जब जब अपने घर आती है वो यहां जाया करती है मुझे  भी इच्छा तो है लेकिन मेरी गाड़ी का वक्त हो गया है और जिंदगी रही तो फिर कभी यहां जरूर आउंगा चर्च देखने,
बस दोस्तों आज जशपुर में ये मेरा पहला और अंतिम दिन है मै अपनी अंजली से विदा लेकर अपने घर प्रस्थान कर रहा हुं दोनों की आंखें थोड़ी नम है मन में थोड़ा गम है लेकिन यही सच्चाई है और यही दुनिया का नियम है ।......... गाड़ी स्टार्ट हो गई मैने अंजली को हांथ दिखया उसके आंसू छलक ही गये मैने ईशारे से मना किया कि मत रो मुझे अच्छा नही लगेगा मुझे हंसता हुआ जाने दो उसने एक हल्की सी स्माईल दी और फिर हम दोनों देखते ही देखते एक दुसरे की आंखों से ओझल हो गये । बस दोस्तों जशपुर का सफर समाप्त हुआ मै लगभग 8 घंटे बाद अपने घर मे मिलुंगा । बाय दोस्तों एण्ड बाय बिट्टू।

मै अपने घर 5 दिनों के बाद आ रहा हुं किसी को बिना कुछ बताये गया था न जाने कैसे- कैसे सवाल उठेंगे सोच कर थोड़ा अच्छा नही लग रहा है और मेरी गाड़ी ने भी आज मेरा साथ ठिक से नही दिया मेरी गाड़ी रास्ते में 3 बार खराब हुई जिससे मै 4 घण्टे और लेट हो गया हुं रात के ग्यारह बज रहे हैं मै रास्ते में अकेला सोचता हुआ पैदल चला जा रहा हु रास्ते सुनसान और अंधेरे में डुबा हुआ है आगे पीछे कुछ नजर भी नही आ रहा है और किसी तरह मै अपने घर तक पहुंच गया हंु दरवाजे बंद हैं सभी सो चुके हैं मैने दरवाजे पर दस्तक दी लगभग 10 मिनट इंतजार करने के बाद मां ने दरवाजा खोला मुझे देख कर वो कुछ भी न बोली मै अंदर जाकर अपने कमरे में सो गया सुबह कई सवाल उठे कहां गये थे, क्यों गये थे , किसे बता कर गये थे, किसने जाने को कहा था ऐसा क्या काम था, वहां हमारा कौन है   जिसके लिए तुम गये थे मैने कुछ भी नही कहा क्योंकि अपनी सफाई में कहने के लिए मेरे पास कुछ भी  नही है थोड़ी देर बाद सब शांत हो गये मैने अंजली को फोन किया उसे बताया कि मै ठीक से पहुंच गया हुं  तुम अपना ख्याल रखना। कुछ दिनों तक घर वाले नाराज रहे फिर समय के साथ सब कुछ ठीक हो ही जाता है।
आज मुझे जशपुर से लौटे लगभग 7 महिने हो गये हैं और एक बार फिर पुलिस की भर्ति के लिए मुझे अंबिकापुर जाना है मैने अंजली को सूचना दे दी है और वो भी मेरे साथ जाना चाहती है मै रास्ते मै उससे मिलूंगा वो बतौली में मेरा इंतजार करेगी मै अपने समय से निकल रहा हुं 6 घंटे का सफर है उसके बाद उसे देख पाउंगा मै बहुत एक्साईटेड हुं ।
6 घंटे बाद हम मिले मैने उसके लिये सीट बुक कर रखी थी और फिर हम अंबिकापुर के लिए रवाना हो गये अभी 1 घण्टे का सफर और बाकी है, अंबिकापुर पहुंचने के बाद हमने रिक्शा पकड़ा और कलेक्टरेड पहुंचे लोगों की काफी भीड़ है उम्मिदवारों की लंबी कतार देखने लायक है पहले कभी मैने इतनी भीड़ यहां नही देखी थी ऐसा लग रहा है मानो कंुभ के मेले में पहुंच गया हुं सरकारी कर्मचारीयों का काम तो आप लोग जानते ही हैं जब तक एक पान खत्म नही हो जाता इनका हांथ नही चलता पता नही हमारे देश का ही ये हाल है या ......
खैर छोंडो इन बातों को मै कतार में खड़ा हु अंजली मेरा वेट कर रही है मै भी चाहता हुं कि किसी तरह से मेरी पारी आए मेरा फार्म जमा हो जाये और फिर जल्दी से हम दोनो यहां से निकलें
लेकिन 3 घंटे लाईन में खडे़ रहने के बाद मेरी पारी आई और अभी शाम के 6ः30 मिनट हो गये हैं ठंड भी बढ़ गई है सरगुजा का ठंड़ इसीलिए तो इसे छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है मैनपाट में इसका सबसे गहरा असर देखने को मिलता है लेकिन यहां भी मै तो उसी ठंड को महसूस कर रहा हंु , मैने हम दोनों के लिए कुद बनवाया है जिसमें मुंगफली के दाने, कुछ चिप्स, मिक्सचर और पता नही कुछ-कुछ है इस आयटम का नाम तो मै नही जानता लकिन है बहुत ही टेस्टी ऐसे मौसम के लिए और क्या चाहिए हम दोनों बस स्टैण्ड आ गये हैं और हमारी गाड़ी का पता नही हैं मै चाहता था कि रायगढ़ वाली गाड़ी मिल जाती तो अंजली को बतौली में उतार कर अपने घर के लिए निकल जाता लेकिन गाड़ी 8 बजे है और बतौली पहुंचते हमें 9 बजेंगे फिर अंजली का रास्ता वहां से आधे घंटे का है जो बहुत ही इन्टेरियर है पता नही हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है हर बार मै ही क्यों फंस जाता हुं लेकिन जाना तो पड़ेगा ही हमने इंतजार किया गाड़ी आ गई है मैने दो टिकटे ली एक रायगढ़ और दूसरी बतौली तक के लिए बतौली तक आने पर मैने देखा की रात काफी ज्यादा हो गर्इ्र है ये अकेली वहां तक नही जा सकेगी और कंडक्रों से उलझना मुझे पसंद नही है मै पैसे वापस ननही मांग सकता अब मेरे सामने सिर्फ एक ही रास्ता है अंजली को अपने साथ घर ले जाना और वैसे भी उसने मेरा सथ दिया है उसका कोई काम नही था फिर भी उसने मेरे लिए अपना समय बर्बाद किया मैने कंउक्टर से एक टिकट और ली रायगढ़ के लिए रात के दो बज चुके हैं हम रायगढ पहुच गये हैं मैेने फिर रिक्शा किराय किया और फिर हम आने लगे तभी कुछ लडके हमार पिछा कर रहे थे रिक्शा वाला भी उर गया उसने हमें पुल के पहले ही छोंड दिया मैने उसे डांटा अैर कहा आप पैसे किस चिज के लेते हो हमें हमारे ठीकाने तक छोंडने के ना फिर ऐसे आप कैसे जा सकते हो उसने कहा मै डर रहा हुं आप लोगों के साथ मुझे भी कुछ  हो गया तो मैने कहा क्या मतलब है आपका
ये लोग शहर के बदमाश हैं और मै इस शहर में नया हुं मुझे कुछ सही नही लग रहा है आप चाहे तो मुझे पैसे मत दें लेकिन मै आगे नही जा सकता मैने कहा कोई बात नही कितने पैसे देने हैं बताओ 40 रूपये उसने कहा मै उसके डर को समझ गया डर तो मै भी रहा था क्योंकि मै अकेला और वो 5 उपर से लड़की मेरे साथ मैने रिक्शा वाले को पैसे दिये वो चला गया तभी उनमें से एक लड़का मेरे पास आकर कहने लगा इतनी रात को कहां से आ रहे हो मैने अकड़ कर जवाब दिया देखते हुए पुछने का कारण बताओगे, कौन हो तुम उसका अगला सवाल मैने कहा आगे जो नजर आ रहा है वहां जाकर मेरे बारे में जानकारी ले लो तो बेहतर होगा वो समझ गये की ये जरूर यहीं आसपास का है और हमें कुछ करने से पहले समझ लेना चाहीए उसने अपने दोस्तों से कहा चलो अपना ही भाई है जाओ भाई बुरा मत मानना हमारा तो लगा रहता है मैने कुछ नही कहा और वो चले गये हम दोनों पैदल ही मेरे घर तक आ गये वो डर रही थी क्योंकि मां और बाबूजी उसे मेरे साथ देख कर क्या सोंचेंगे और वो पिछे हट रही है मैने कहा चलो जो होगा देखेंगे और अगर नही जाना चाहती हो तो ठीक है बारह का माहौल तो तुम देख ही चुकी हो वो और डर गई मैेेन मुस्कुराते हुए उसे कहा कुछ नही होगा बडे़ हैं तो कुछ तो कहेंगे ही और हम अपनी परेशानी बतायेंगे तो वो समझ ही जायेंगे। और वो हमारे दुश्मन तो हैं नही की हमें मार मार के मार ही देंगे, दो बात कह भी देंगे तो बूरा मत मानना एक दिन इसी घर में और इनके साथ ही तुम्हे रहना है हमने दरवाजा खुलवाया इस बार भी मां ही आई वो तो हमें देख कर दंग रह गई शायद मां ने सोंचा की मै उसे भगा कर ले आया हुं हम दोनो अंदर आ गये पिताजी भी जाग रहे थे उन्होंने कहा दोनो कहां से आ रहे हो मैने कहा सांथ में गये थे मैने ही सांथ मांगा था तो इसने मेरा साथ दिया अंबिकापुर में ही देर हो गई और रात हो जाने के कारण हमारे पास यहां आने के अलावा और कोई रास्ता नही था तो मै इसे यहां ले आया मांने उसके लिए बिस्तर बिछा दिया थोडे़ नाराज तो हैं लेकिन मै चाहता हुं कि इनकी नाराजगी अंजली के सामने न ही आये तो अच्छा होता ।
सुबह मां और पिता जी तो अपने काम से चले गये बहनों के साथ हम रह गये एक दिन मैने उसे रूकने के लिए कहा लेकिन वो मान नही रही थी मन तो था उसका भी पर मां-पिताजी के डर से नही नही करती रही लेकिन मेरे जिद के सामने उसे झुकना ही पड़ा वो रूक गर्इ्र और अगली सुबह मै उसे पत्थलगांव तक छोंड़ आया।
और अब हम सिर्फ फोन में ही बातें किया करते हैं लेकिन मेरे परिवार के सदस्यों को ये सब कुछ पसंद नही आ रहा है जाहीर सी बात है किसी को भी अच्छा नही लगेगा। पिताजी ने अब मुझसे अच्छे से बात करना बंद कर दिया है उनका व्यवहार मेरे प्रति अब बहुत बदल गया है चार पांच महिने से के बाद मेरे और मेरे पिताजी के बीच बात बहुत बिगड़ गई है हर बात में वो कहते हैं मेरे घर मे ऐसा नही होना चाहिए अब तो वो हर बात में मेरा मेरा बस मेरा ही लगाते रहते हैं बात बात में अंजली के बारे कहेंगे जो मुझे पसंद नही है मुझे कुछ भी कहें मै सुनने के लिए तैयार हुं लेकिन उसकी क्या गलती है उसने आपसे कभी कोई शिकायत नही रखी वो समझदार है  वो हमेशा आप लोगों के लिए अच्छा ही सोंचती है उसके मन में कोई खोट नही है आप उसे गलत समझ रहे हैं मै गया था उसके पास वो चलकर नही आई थी गलती मेरी है आप मुझे कहिए हर बार कहते हैं कि जब से हमने उन्हे किराये में घर दिया था तब से मै तुम्हे देख रहा हुं हमेशा उसके आस पास मंडराते रहते हो उसने तुम्हे कुछ कर दिया है गांव वाले ऐसे ही होते हैं वगैरह वगैरह जो मुझे बहुत तकलीफ पहुंचा रहे थे मैने पहली बार अपने पिताजी से इतनी लंबी बहस की थी मन पूरी तरह निराश हो गया था सोंचता था कि काश मै पैदा ही  हुआ होता मेरी वजह से इन्हे इतनी तकलीफ हो रही है सोंचा दो दिनों के बाद सब ठीक हो जायेगा लेकिन हालात और खराब होने लगे मै बर्दाश नही कर सका मैने मां की ओर देखा उन्होने भी मेरा साथ नही दिया सोंचा की अब मेरा कुछ भी नही रहा ऐसा लग रहा था कि सभी पराये हो गये है मेरे पास और कोई रास्ता नजर नही आ रहा था मैने रोते हुए अपने कपड़े पैक किये और घर से निकल गया बिना कुछ सोंचे समझे मै अपनी जिंदगी जिने की तलाश में सब को भूल जाना चाहता हुं आज अंजली का बर्थ डे भी है मेरे जेब में सिर्फ 200 रूपये हैं और घर से निकलने के बाद वापस लौटने की सोंच भी नही सकता और मन भी तो नही कर रहा है मैने बतौली का टिकट कटाया और अपने आप से कहा कि कुछ भी हो जये कभी लौटने की सोंचना भी मत मै  बतौली पहुंच गया अंजली को मैने पहले ही बोल रखा था कि मेरे लिए एक रूम की व्यवस्था कर देना मै और ज्यादा दिन यहां अपनेे आप को नही रख पाउंगा उसने मुझे पहले समझाया लेकिन मै समझना नही चाहता था और उसने मेरा साथ दिया मै अपना लगेज एक दुकान में छोंड़ कर सीधंे अंजली के पास पहुच गया मैने उसे कमरा दिखाने ले चलने को कहा वो मेरी बात को मजाक समझ रही थी उसे पता ही नही था की मै जो बोल रहा था वो सब सच है उसने अपना एक्टीवा निकाल कर मुझे चलाने के लिए कहा फिर हम दोनों एक घर में गये और वहां बात की तो पता चला की किराये पर मकान मिल जाएगा उनके कुछ कहने से पहले मैने ही बोल दिया हम दोनों रहेंगे आप लोगों को कोई परेशानी तो नही होगी
नही नही हमें कोई परेशानी नही होगी और वैसे भी मै अपनी बहु के साथ ही रहती हुं 4 बेटे हैं जो अपने अपने परिवार को संभाल रहें हैं कौन कहां रहते हैं मुझेे नही पता आप लोग यहां रहेंगे तो इतने बड़े घर की देखभाल भी हो जायेगी और घर भी भरा पूरा लगने लगेगा आप लोग कल से आ सकते हैं मै कमरे की सफाई करवा दुंगी। मैने कहा मुझे अभी रहने के लिए कमरा चाहिए क्या हो पायेगा। थोड़ी देर तक तो वह कुछ सोंचने लगी फिर उसने कहा तो अभी आप सामान ले कर आये हैं
मैने कहा अगर आप हां कहें तो ले कर आ सकता हुं उन्होने हां कह दिया मै दुकान में गया जहां मैने अपना सामान रखवाया था और आधे घंटे के भीतर वहां पहुंच गया उसने मेरे सामान को देखा एक बैग और कुछ थैले के अलावा मेरे पास कुछ भी नही था उसने कमरे की चाबी मेरे हांथ मे दे दी मैने दरवाजा खोला अंदर गया कमरे की लाईट ओन की तो देखा कमरा बहुत ही प्यारा है छोटा है लेकिन ये मेरे छोटे से परिवार के लिए बहुत ही अच्छा है शिकायत है तो बस इतनी ही की मेरे कमरे के बाहर बकरीयों का आना जाना लगा रहता है और मै बकरिययों से बहुत डरता हुं क्योंकि बचपन में मुझे एक बकरी ने जोर का लात मारा था जिससे मुझे आज भी डर लगा रहता है और बकरीयों के बच्चे काफी चंचल होते हैं जो कभी भी कुद कर कमरे में आ सकते हैं और मेरे सामान को नुकसान हो सकता है बाहर बाथरूम है और उसके बाहर एक सेठ का बागान है जो काफी बड़ा है उस बागान में दो कब्र हैं जो कमरे से निकलते ही दिखाई देन लगता है थोड़ा डर भी लगता है लेकिन एडजेसट करना होगा। शाम हो गई है और बरसात का दिन भी है पानी के गिरने के आसार भी नजर आ रहे हैं। हम दोनो ने गाड़ी निकाली और प्रेम जनरल स्टोर चले गये जो मेरे रूम से 3 किमी की दूरी पर है अंजली
के.जी.बी.व्ही . की सुप्रींटेंड है तो हॉस्टल उसकी जिम्मेदारी से चलती है और समान हमेशा यहीं से जाता है वो इस दुकान से बंधे हुए हैं सभी अंजली को जानते हैं मैडम आई है कह कर सभी ग्राहकों को छोंड कर इनका काम पहले किया जाता है और करेंगे क्यों नही क्योंकि सबसे बड़ी ग्राहक तो अंजली ही है हर महिने कम से कम 40-45 हजार रूपये का सामान जो लेती हैं अंजली ने कुछ सामानों की लिस्ट दुकानदार के हांथ मे थमा दि ये सभी घरेलू सामानों की सूची थी जैसे कि चटाई, बाल्टी , चम्मच कुछ बर्तन और बहुत सी चिजें वो जानती है क्या हमें चाहिए । मै तो पहली बार अपने घर से निकला हुं तो इतना आईडिया नही है जो कुछ लेना था उसी ने लिया मुझसे बार बार पुछती थी और कुछ चाहिए मै नही नही करता रहा उसने एक बार और कहा तो मैने कुरकुरे और हल्दी राम के मुंगदाल की डिमांड उसके सामने रख दि दुकान दार पुछ रहे थे कौन हैं मैडम आपके गांव से आये हैं क्या
रिस्तेदार है,ं दोस्त हैं, उसने एक जवाब दिया जल्दी सामान पैक करो बारीश होने वाली है वो डर गये। और उसका धाक भी तो है अगर कोई बात पसंद नही आयेगी तो अपना सबसे किमती ग्राहक खो बैठेंगे तभी सेठ जी ने तारो (सेठ जी का नौकर) को आवाज लगाई और सामन पैक करके उसे गाड़ी में रखवा दिया। हम घर आने लगे तभी अंजली ने कहा कुछ लेते जाते हैं अभी खाना नही बन पायेगा तो हमने रास्तें में एक होटल से समोसे खरीद लिये और कमरे मे आकर आराम से बैठ कर बातें करते करते खाने लगे कमरे में हमारे सामान बिखरे पडे़ थे उसे हमने एक तरफ रख दिया और थके थे इस वजह से जल्दी ही सो गये नींद कब आ गई हमें पता ही नही चला तभी अचानक दरवाजे के बाहर आवज आने लगी दरवाजा खोलिए ना मुझे डर लग रहा है अंकल दरवाजा खोलिए न......हमारी नींद खुल गई थी मैने घड़ी में समय देखा तो रात के 11ः30 हो रहे थे इतनी रात को कौन हो सकता है और आज तो हम लोग पहली बार आये हैं फिर मालकिन की आवाज तो नही है कौन हो सकता है आवाज एक बच्ची की थी जो काफी डरी हुई थी मैने दरवाजा खोला तो देखा एक सात-आठ साल की बच्ची रो रही है मेरे कमरे के बाहर, मैने उससे पुछा क्या बात है इतनी रात को तुम क्यों रो रही हो , उसने कहा मै दादी के साथ सोने आई थी साथ में सोये थे और अब दादी मेरे साथ नही है मै अकेले डर रही थी, मैने उसे अपने कमरे के अंदर बुलाया और उसे खाने के लिए जो कुुरकुरे लाए थे उसे दिया मैने कहा दादी कहीं गई होगी बेटा तुम्हे डर लग रहा है तो तुम हमारे साथ सो जाओ जब दादी आ जायेगी तो चले जाना वो सो गई लेकिन अंजली और मै जाग ही रहे थे सोंच रहे थे कि आखिर बुढिया कहां गई होगी इतनी रात में कई प्रकार के ख्याल भी हमारे मन में आ रहे थे मै तो बार बार यही सोंच रहा था पहली रात ऐसी कट रही है तो पता नही आगे कैसी होगी इस समय उनकी बहु भी अपने नैहर गई हुई है घर में मालकीन के अलावा हम दोनो और उसकी पोती ही हैं बच्ची फिर उठ गई उसने कहा नींद नही आ रही है मुझे मम्मी के पास पहुचा दीजिए मैने मना किया अैार समझाया दादी के आने तक हमें इंतजार करना चाहिए लेकिन वो नही मानी मजबूरन हमें उसकी बात माननी पड़ी मै उसे उसके मम्मी-पापा के पास छोंड़़ आया ज्यादा दूर नही है बस एक दो घर का फासला है और फिर हम अपने कमरे में चले गये, रात को ढाई बजे वो बाहर से आई अपने कमरे में अपनी पोती को न पाकर थोड़ी डर गई उसने सीधे मेरे कमरे के पास आकर हमें आवाज दी गुडडू ....... गुडडू ......
नया हुं मेरा नाम नही जानती इस लिए इस नाम से पुकार रही है मैने आवाज दी हां आंटी जी रिया आई थी क्या यहां , मैने कहां हां आई थी अभी अभी उसे उसके मम्मी पापा के पास छोड़ कर आया हु जिद कर रही थी इस लिए जाना पड़ा उसने कहा हां ठीक है मै थोड़ा बाहर निकली थी टहलने के लिए अभी अभी गई थी मैने कहा हां ठीक है और वा चली गई मैने अंजली से कहा तीन घंटे बाद वो आई है पता नही कहां गई थी मुझे तो इससे डर सा लगने लगा है उसने कहा सो जाओ हम क्या कह सकते हैं अभी तो एक दुसरे के बारे में कुछ नही जानते तो कुछ कहना गलत होगा। अैार हम सो गये।
अगली सुबह हम गुडडी के रूम गये बोदा जहां पहले अंजली गंुडडी के साथ रहती थी अभी वह घर गई हुई उसके पास एक स्टोव है जो उपयोग नही होता है उसे हम लेने जा रहे हैं
(नींद आ रही है दोस्तों अभी रात के 2ः14 मिनट हो चुके हैं बाकी घटना आपको कल बताउंगा) हववक दपहीजण्


हम बोदा आ चुके हैं अंजली के पास कमरे की चाबी है उसने दरवाजा खोला कुछ सामान एक थैले में डाल कर हम लोग वापस अपने रूम आ गये। स्टोव तो थी मिटटी तेल खत्म हो गया था तो हमने मकान मालकीन से ले ली उनका किराना स्टोर है और हमें कुछ आवश्यकता की चीजें यहिं से मिल जाती हैं जैसे कल रात को लाईट चली गई थी तो कैण्डल हमने लिया था, हमने आज कमरे को संवारने में ही अपना समय बीता दिया लगभग 12 बजे हमने खाना पकाया और 1ः30 तक हमने लंच कर लिया। आज अंजली स्कूल नही गई है उसने आज मर्सेला मैडम को चार्ज दिया है वो यहां की उपसंचालिका हैं जो अंजली की अनुपस्थिति में पूरा कार्यभार संभालती हैं और इनका घर भी स्कूल के पास ही है तो इन्हे ज्यादा परेशानी नही होती है , अंजली को काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है हर तीन तारीख को अंबिकापुर में मिटींग अटेंड करना बच्चों के लिए शॉपींग करना उनके स्कूल में 100 बच्चों के लिए सीटें होती हैं हर बार बहुत से लोगों को यहां से निराश लौटना पड़ता है क्योंकि हर मां-बाप यही चाहते हैं कि हमारी बच्ची यहां पढ़े लेकिन सीट कम होने के कारण सभी को यहां सीट नही मिल पाती है जिससे कई लोगों को लगता है कि मैडम अपने परिचय के लोगों का ही ध्यान रखती हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है क्योंकि यहां अंजली के कोई रिश्तेदार नही हैं वो तो जशपुर जिले के कुनकुरी ब्लाक की रहने वाली है जो यहां से 120 किमी की दूरी पर है और भला इतने दूर से कौन यहां आएंगे। यह स्कूल मुझे बहुत पसंद है यहां ऐसी लड़कीयों को रखा जाता है जो किसी कारण से पढ़ नही पायी या घरवालों के पास कोई साधन नही है जिससे वो दूर तक अपनी लड़कीयों को भेज सकें रेगुलर पढाई करने वालों को यहां भर्ती नही लिया जाता ये एक खासियत है यहां कि सोंचता हुं कि कितना अच्छा काम कर रही है मेरी अंजली, मुझे उस पर नाज है लेकिन यह कहना कितना आसान है, जो यहां हैंडल करते हैं उन्हे पता है कि परेशानीयां कितनी हैं कभी कोई बीमार हो गये तो उसके साथ रहना कोई ऐसी लड़की जो पढने मे मन नही लगा पा रही है बिना बताये कहीं भाग गई तो उसकी जिम्मेदारी और ऐसे ना जाने कितनी बातें हैं यहां लडकों का आना मना है लेकिन मै आता हुं क्योंकि सुप्रींटेंड अंजली है यहां तक की इस स्कूल में जेन्टस टीचर भी लागू नही हैं मेरे अलावा यहां अगर लड़कों में कोई है तो वाक है एक चौकिदार जो मेरी ही उम्र का है और एक रसोईया चौकिदार का नाम जनक राजवाडे़ है वो अंबिकापुर का रहने वाला है उसकी नियुक्ति जिले से हुई है 10 वी पास है और रसोईया जिनका नाम आसुतोष पैंकरा है वो यही बतौली का रहने वाला है इसे यूं ही रखा गया था जब तब जिले से किसी की नियुक्ति नही हो जाती इनकी सेवा कभी भी समाप्त की जा सकती थी ये भी मेरे ही उम्र के हैं एक रासोईया और हैं जिनका नाम शांती है और शांती की सहायिका हैं शीला जिन्हें हम मौसी कहते हैं ये उम्र और तजुर्बे में हमसे बहुत बड़ी हैं लोग इनके बारे में कहते हैं कि इन्हे जादू आता है किसी का भविष्य बता सकती हैं लेकिन मै अन बातों में विश्वास नही रखता। सभी मैडम इन्हे इनके नाम से बुलाते हैं और अपना रौब इन्हें दिखाते रहते हैं कोई कहेंगे जनक गेट खोलो, शांती पानी पिलाओ, आसुतोष तुम जाकर ये सामान ले आओ लेकिन अंजली का व्यवहार ऐसा नही है वो हमेशा इनकी ईज्जत करती है कभी इन्हें इनके नाम से नही पुकारती हमेशा दीदी भैया कहकर इन्हें संबोधित करती है ये भी अंजली की काफी आदर करते हैं और सच कहुं तो उससे डरते भी हैं मेरे आने से ये लोग बहुत खुश हैं ये मुझे सर कहते हैं तो मुझे अच्छा नही लगता क्योंकि हम एक उम्र के लगते हैं और मुझे कोई सर कहे तो मै अपने आप में लज्जीत हो जाता हुं मैने कहा मेरा नाम बजरंग है और मै आपके दोस्त की तरह हुं मुझे सर मत कहना अगर कहना ही है तो दोस्त कह सकते हो अंजली आप लोगों को वेतन देती है मै नही मुझे कभी उससे कम्पेयर मत करना आप लोगों को मेरी किसी बात से कोई परेशानी तो नही हो रही है ना, नही भैया जी उन्होने मुझे भैया कहना शुरू कर दिया और मै भी उन्हे भैया ही कहता हुं ।
अच्छा लगता है और फिर मेरा यहां कोई था भी तो नही अंजली के अलावा, बीच-बीच मे मै इनसे मिलने जाया करता हंू जिससे अकेलापन महसूस नही होता ।
अंजली दिन में यहां रहती है और फिर हम साथ रहते हैं इससे पहले वो के.जी.बी.व्ही. में ही रहती थी क्योंकि उसे बच्चों के साथ ही रहना था उसे बच्चों को अकेला छोंडने की अनुमति नही है लेकिन ये संभव हो सका है तो सिर्फ चार लोगों की वजह से शांती दीदी, जनक भैया, आसुतोष भैया, और शीला मौसी ये हमारी बहुत मदद करते हैं मै इन्हे कभी नही भूल पाउंगा और हमेशा आप सभी का आभारी रहूंगा।
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 अंजली और मुझे साथ रहते एक सप्ताह लगभग हो गया है और अब गुडडी भी घर से आ गई है उसका जॉब भी यही पास में ही है दोनों की जोईनिंग साथ में ही हुई थी और उसे पता चल गया है कि हम दोनों साथ में रहने लगे हैं और मै ये जानता हूं की ये बात उन्हे अच्छी नही लगेगी हर किसी की बात है लेकिन वो यह बात भी जानते है कि हमारा साथ आज का नही है हम पिछले कई सालों से एक दूसरे को पसंद करते हैं तो मेरा बस यही कहना है कि हमें भी खुश रहने दो हम कभी आपसे किसी प्रकार की सहायता नही लेंगे और कभी किसी प्रकार की शिकायत का मौका नही देंगे बस आप हमारे रिश्ते को बना रहने दीजिए मै हमेशा अंजली को खुश ही रखुंगा उसे कभी किसी तरह की परेशानी नही होने दूंगा। लेकिन ये लोग नही समझेंगे क्योंकि अंजली की सबसे बड़ी दीदी एमरेंसिया ने लव मैरिज किया था आज उसके तीन बच्चे हैं बड़ी बेटी बुलबुल, हेमू और सबसे छोटा नयन और अब उनका साथ छूट चुका है किसी कारण से अंजली के जीजा ने उन्हे छोंड कर दूसरी शादी रचा ली है और अपना अलग परिवार बना चुका है और इस घटना की वजह से इनके मन में प्यार से विश्वास उठ गया है लेकिन हर किसी को एक से तुलना करना गलत है क्योंकि हर कोई एक जैसे विचारधारा नही रखते और मै उनमें से नही हूं ये बात मै आज नही समय आने पर जरूर साबित करूंगा । रात के आठ बजे होंगे हमने कुकर में चावल चढ़ा दिया है बच्चों को छात्रवृती देना है जिसकी लिस्ट हम दोनों साथ मिलकर बना रहे हैं दिन में समय भी नही मिल पाता है और अंजली अकेले हैंण्डल नही कर सकती है इसलिए मै उसकी मदद कर रहा हूं तभी गुडडी ने दस्तक दी, वो एक बार पहले भी यहां आ चूकी थी और हमें देख कर गई थी उस बार वो कुछ कह नही सकी लेकिन इस बार पूरी तैयारी से आई है आते ही उसने अंजली से कहा सुपर्णा चलो मै तुम्हे लेने आई हुं घर वालों को पता चला है और सभी बहुत गुस्से में हैं अंजली कुछ नही बोल सकी, वो चुपचाप बैठ कर अपना काम कर ही रही थी उसने दो तीन बार यही बात कही अंजली ने जवाब दिया नही अभी नही जाउंगी सुबह आ जाउंगी क्योंकि वो जानती थी अब बात बिगड़ने वाली है वो चली जाती तो भी ठीक नही था और नही जाती तो भी, इसलिए मै सोंचता हूं उसका जवाब सही था मै दोनों के बीच में कुछ कहना नही चाहता था इसलिए मै भी चेक समेट रहा था मै उसका ईरादा जान रहा था अब हंगामा होने वाला है मैने चेक संभाल कर एक कोने में रख दिया। गुडडी ने एमरंेसिया दीदी को फोन कर दिया गुडडी केसाथ एक लड़का भी आया है जो कुछ समझ नही पा रहा है कि आखिर क्या हो रहा है वो तो मुझे भी नही जानता और बहुत ही सीधा साधा लग रहा है गुडडी ने हमारी शिकायत की उसने फोन अंजली की ओर बढ़ाते हुए कहा लो दीदी से बात करो अंजली ने कुछ नही कहा वो बात करना नही चाहती है गुडडी ने अब मेरे तरफ फोन को बढ़ाया मैने कहा उन्से मै क्या बात करूंगा मै बात नही कर सकता। उसने स्पीकर ओन कर दिया और बड़ी बहन को बताया की ये लोग बात नही कर रहे हैं उसने फोन में ही सभी प्रकार का कह दिया जो एक लड़की से मै पहली बार सुन रहा था ऐसी बातें मैने आज से पहले कभी किसी लड़की की जुबां से नही सुनी थी बहुत ही खराब और गुससा आ रहा है लेकिन मै अपने गुस्से को अपने काबू में रखे हुए हुं क्योंकि मेरे गुस्से पर बहुत ही कम कंटरोल हो पाता है इसलिए मै चाहता हुं कि ये लोग यहां से चले जायें और मै इस क्षेत्र में भी नया हूं तो मै नही चाहता की हमारी वजह से यहां का माहौल खराब हो जाये तमाशा बनना मुझे पसंद नही है लेकिन यही हो रहा है वो जोर जोर से चिल्ला रही हैं भला बुरा सभी प्रकार का कहे जा रही है और अब उसने अंजली के उपर हाथ उठा दिया अंजली के आंसू निकल गये लेकिन वो सहम कर रह गई । अब उसने मेरे उपर भी हाथ उटा दिया मै तो पहले से ही गुस्से में हुं पहली बार किसी लड़की का हाथ मेरे लिए उठा है मकान मालकिन दूर से ही सब कुछ सुन और देख रही है गुडडी ने मेरे उपर आठ बार हाथ उठाया जिसमें से तीन तो मेरे गालों पर और बाकी मेरे पीठ पर मै सहन कर रहा हुं क्योंकि मुझे मेरी गलती का एहसास है जो हमने गलती की है उसकी सजा तो मिलेगी ये जानता था लेकिन इस तरह मिलेगी ये नही सोंचा था मैने तो सोंचा था कि अंजली के भाई आयेंगे और जो होना होगा उन्के साथ होगा मैने सोंच रखा था कि अपने गुस्से पर मुझे काबू रखना होगा । मै कुछ ना तो कह सका और ना ही कुछ कर सका जब उनकी गालीयों और मार से हम पर कोई असर नही हुआ तो उसे कुछ नही सुझा हमारा कुकर भी बार बार हमसे कह रहा है अरे कोई मेरा भी ख्याल करो नही तो आप लोगों की बातों को सुन सुन कर फट जाउंगा। मै जाकर गैस बंद किया और कुकर नीचे उतार दिया और गैस बंद कर दिया गुडडी देख रही थी मै फिर अपने जगह पर आकर खड़ा हो गया हुं म नही मन कह रहा हु आप लोग यहां से चले जाईए हमारा तमाशा क्यों बना रही है ये भी तो आपही की बहन है और मुझे भी तो बचपन से जान रही हैं जब मै सात-आठ साल का था तभी से इनके घर वाले मुझे जानते हैं अपने बच्चे की तहर इन्होने मुझे नहलाया था कभी अपने साथ एक थाली में बैठाकर साथ खिलाया था और आज इनका ये रूप मेरे लिए आखिर क्यों ? बस मेरी इतनी ही गलती है कि मै अंजली को चाहता हुं उसके साथ जिना चाहता हुं और मै कोई पहला व्यक्ति तो नही हूं जो ऐसा कर रहा हूं दुनिया में और भी लोग हैं जिन्होने ऐसा काम किया है और अंत में सभी को इस सच्चाई को स्वीकार करना ही पड़ता है। लेकिन वो नही मान रही हैं उन्होंने सिलेण्डर ऑन कर दिया और लाईटर अपने हाथ में लेकर धमकी दे रही हैं कि चलो नही तो मै आग लगा दूंगी गैस पूरे कमरे में फैल गया है सिलेण्डर को अभी दो ही दिन हुए होंगें और उसका पता नही क्या होने वाला था शायद मै उसे बंद नही करता तो वो रात उसकी आखरी रात होती । अंजली ने मुझसे कहा गैस बंद कर दो पूरे कमरे में फैल रहा है मै उठ कर उसे बंद करने गया जैसी ही मै रेगुलेटर बंद करने वाला था गुडडी ने मुझे जोर से धक्का दिया, धक्का इतने जोरों का था कि मै जमीन में गिर गया, अब मेरा गुस्सा बढ़ रहा है मै और ज्यादा बर्दाश नही कर सकता मै फिर उठा और एक बार फिर बंद करने की कोशिश कर रहा हूं उसने इस बार मुझे लात से मार इस बार मै गिरा तो नही क्योंकि मै जानता था ऐसा ही कुछ होने वाला है लेकिन थोड़ा हिल गया क्योंकि वो बहुत ही स्ट्रोंग है लेकिन मैने एक बार फिर प्रयास किया उसने मुझे कुछ करने की कोशिश की लेकिन इस बार मै अपने कार्य में सफल रहा मैने गैस बंद कर दिया वो मेरे उपर हाथ उठाने ही वाली थी कि मैने उसका हाथ रोक लिया और उसे जोर से दो थप्पड़ जड़ दिया ये देख कर सभी हैरान हो गये मै जिसकी हमंेशा ईज्जत करता आया था वो रिश्ता आज खत्म हो गया क्या करता बर्दाश करने की भी एक हद होती है जो अब अपनी सीमा से बाहर हो चुकी थी इससे ज्यादा मै बर्दाश नही कर सकता था मैने उसे इसलिए भी मारा क्योंकि वो पागलों की तरह माहौल बना रही थी और मै उसे होश में लाना चाहता था अंजली का हाथ पकड़ कर उसे खिंच कर अपने साथ ले जाना चाहती थी जो ठीक नही है क्योंकि उसकी भी अपनी जिंदगी है वो भी तो कुछ सोंच कर ही मेरे साथ रहने आई है ना एक बार जानकी के साथ भी ऐसा ही कुछ इन्होंने किया था एक दरोगा दादा हैं जो इनके रिश्तेदार हैं उन्होंने जानकी के घर में इनके कहने पर पुलिस भेज कर उसे पिटवाया भी था मै इस बारे में ज्यादा कुछ तो नही जानता हूं लेकिन ये खबर शायद अंजली ने ही मुझे दिया था और शायद इसी कारण उसने अंजली पर अपना बदला निकाला होगा । मै सबकी जड़ उसके परिवार के कुछ सदस्यों को ही समझता हुं और अब पारी मेरी है लेकिन मै इतना कमजोर नही हुं अंजली मेरे पक्ष में है मेरे साथ है तो मै किसी से हार नही मानने वाला ना तो मै अपने घरवालों से डरूंगा और न ही किसी और से, अंजली बार बार कह रही थी मै नही जाउंगी और अपने आप को खिंच रही थी उसका कहना था कि अब उसे गुडडी का साथ अच्छा नही लगता है हमेशा सामान मै ही खरीदती हुं वो कहते रहती है मेरे पास तो पैसे ही नही हैं वो भी टिचर है उसे भी पैसे मिलते हैं बड़ों को चाहिए की छोटों का ख्याल रखें लेकिन ये तो गलत हो रहा है अपने पैसे एकाउंट में जमा करना और दूसरे के पैसों का उपयोग करना हमेशा उसे शिकायत भी रहती थी लेकिन कह नही पाती थी क्योंकि उसका एक एहसान है अंजली के उपर गुडडी ने उसकी एमएमसी की पढाई के लिए पैसे भीजवाए थे और उसी की वजह से वो आज यहां है लेकिन अंजली ने तो उससे भी ज्यादा लौटाया है एक एक्टीवा खरीदा जिसमें आधे पैसे अंजली ने दिये हैं लगभग छः सात महीने का वेतन उसके खाते में जमा करवाया है और आज तक उसे पाल भी रही थी मै समझता हंू अंजली का गलत उपयोग किया जा रहा है अगर उसके हाथ में कुछ नही होता तो बात अलग है। सभी बातें याद भी आई तो गुस्से से मैने हाथ उठाया क्या गलत किया कुछ नही मै सही था अपने आप में, आज कहती है मेरी बहन तुम कौन हो मै पुछता हुं जब अंजली को अकेला छोंड़ कर घर चली गई थी और एक बंदुक लिए कोई अजनबी छत के रास्ते से उसके कमरे में आता है वो तो गनीमत है की उसे कुछ नही हुआ वरना आज कया जवाब देते उस वक्त वो कहां थी उसकी बहने के प्रति प्रेम कहां गया था, कभी घर का राशन नही खरीदती तो तुम्हारा बहन के प्रति क्या प्यार है तुम लोगांें की वजह से अंजली का पहला प्यार चला गया वो रो रो कर मर रही थी उस समय अगर वो कुछ कर बैठती तो, यही तुम्हारा प्यार है मन मे तो ऐस कई प्रश्न उस समय भी उठ रहे थे लेकिन मै कुछ कह नही सका बस उसे इतना ही कह सका कि तुम एक लालची और मक्कार औरत हो जो सिर्फ अपना ही भला सोंच सकती हो और अपने ही लाभ के लिए सब कर रही हो , मैने अंजली का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खिच रहा था लेकिन वो  हाथ नही छोंड रही थी इसलिए मुझे गुडडी को लात से मारना पड़ा वो कमरे से बाहर की ओर गिर गई बार बार दिखावे के लिए रोती रही और अंजली को चलो चलो कहती रही लेकिन वो नही गई मकान मालकिन ने मेरा पूरा सहयोग दिया उसने कहा जब लड़की जाना नही चाहती है तो तुम जबरदस्ती नही कर सकती चली जाओ नही तो मै पुलिस वालों को बुलालुंगी थाने में सभी मुझे जानते हैं और सभी मेरी बहुत इज्जत करते हैं तुमने इनके कमरे की जो हालत की है और गैस की पाईप अभी भी खुली है कमरा पूरा गैस की बदबू से भर गया है एक मीनट में अंदर हो जाओगी गुडडी थोड़ा डर तो गई लेकिन अब वो बाहर जाकर हल्ला कर रही है रात को रोना वो भी चिल्ला चिल्ला कर अच्छा किसे लगेगा सभी ने मुझे कहा जाने दो चली जायेगी जब थक जायेगी अपने आप से हार मान कर चली जाएगी लेकिन मेरा मन नही मान रहा था उसका ऐसा वर्ताव मेरे लिए ठीक नही था मै ये भी सोंच रहा था अभी तो आसपास वाले सिर्फ सून रहे हैं जब सुबह पुछेंगे तो मै उन्हे क्या जवाब दुंगा सोंचकर ही कितना खराब लगता है नया जगह , नये लोग ,सब कुछ नया और हमारा ऐसा माहौल... आज बहुत ही खराब लग रहा है मै फिर बाहर निकला मेरे पास अब कोई रास्ता नही है इस पालतू लड़की का मुंह बंद करने के लिए मैने लड़के को गाली दी और उसे कहा तुम यहां से भागो नही तो तुम भी मार खाजाओगे, मैने सिर्फ उन्हे यहां से भगाने के लिए ही ऐसा कहा था, फिर भी वो नही मान रही थी तो मैने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उसकी गाड़ी की ओर गया मैने कहा अब सिर्फ एक बार और अंतिम बार कहुंगा जाना है तो यहां से चले जाओ नही तो तेरी गाड़ी चली जायेगी इसके बाद तो वो तुरंत अपना रूप् बदल कर गाड़ी में बैठी और  दोनो यहां से चले गये और अब मै जान गया हुं कि ये सच में बहुत ही मतलबी है हालाकी है अंजली की ही बहन लेकिन बहुत अलग । रात भर हमें नींद नही आई हम सोंचते रहे क्या सही हुआ या गलत किसका पल्ला भारी पड़ने वाला है क्योंकि अभी तो शुरूवात है बस बातें करते रहे खना भी वैसे ही पड़ा है मुझे हंसी भी आ रही है लेकिन ऐसे हालात में हंसू तो कैसे बाहर का वो नाजारा जब गाड़ी पर आंच आने वाली थी तो कैसे उसका रूप बदला मै देख कर हैरान सा रह गया वो ऐसे भागे जैसे क्या कहुं शब्द नही हैं तभी अंजली ने कहा अगर मै तुम्हे नही रोकती तो क्या तुम कुकर से उसे मार ही देते मैने कहा पागल हुं क्या , मैने तो उसे डराने के लिए उठाया था ।
मै ऐसा नही कर सकता था। तीन बजे हमने थोड़ा आराम किया लेकिन नींद नही आई। सुबह के पांच बजे होंगे मै सोंचता रहा क्या मुझे ये करना चाहिए जो मै सोंच रहा था मेरे मन ने मुझे जवाब दिया की ये सही होगा । और मै अपने सोंच पर ही चल पड़ा मैने ठंड बढ़ी हुई है मैने अंजली का जैकेट पहना अपने पीछे एक चाकू और गुडडी के पास जाने के लिए निकल गया मै उससे ठंडे मन से बात करना चाहता हूं और चाकू अपनी सुरक्षा के लिए पकड़ा हुं ना की उन्हे मारने के लिए ।
मै इनके घर के पास हुं मेरा मतलब जहां ये किराये में रहती है मैने अंदर जाने का फैसला लिया आंगन में दो लड़कीया हैं ये यहां काम करती हैं मैने उन्ही से पुछा एक्का मैडम कहां रहती हैं उन्होने बताया उपर वाले कमरे में मै सीधा उपर आ गया दरवाजे पर ठक-ठक की आवाज की गुडडी ने देखा मुझे और देखते ही कहा अंजली कहां है मैने कहा वो कमरे में है और मै आप से बात करने आया हुं जो भी हो रहा है ठीक नही है हम मिलकर बातें कर सकते हैं उन्होने कहा मेरे परिवार को मै बुला रही हूं सभी के सामने बात कर लेना मै अकेले कुछ नही कह सकती उन्होंने और किराये दारों को उठाया मकान मालिक को बुलाया । सभी आ गये हैं उन्होने मकान मालिक से सीधे कहा यही है जिसके साथ कल रात को हाथापाई हो रही थी उन्होने मुझे पहले कहा तुम उपर किसकी अनुमती से आये हो तुम्हे मालूम नही है शायद हमारे घर में अगर किसी से मिलना होता है तो पहले मुझसे परमिशन लेना होता है। मैने कहा- मुझे किसी की परमिशन की जरूरत नही पड़ती क्योंकि इन्होने मेरे घर में कल रात जो हंगामा किया है बस मै जानान चाहता हुं कि अब और कुछ बाकी है या हुआ। अगर ये ठंडे दिमाग से मुझसे बात करना चाहें तो मै कुछ कहना चाहुुंगा सभी मेरी बातों को गौर से सुन रहे थे वो लड़का भी यहीं रहता है जो कल रात सब कुछ देख रहा था अरूणा दीदी भी हैं मै इन्हे जानता हुं और ये भी मुझे जानते हैं हमारी मुलाकात बोदा में ही हुई थी ये गुडडी के साथ ही किराये में रहते हैं ये भी टीचर हैं और अभी दो चार माह की इनकी बेटी है उसका नाम बहुत प्यारा है एरीना, ये सभी हमारी दलीलें सून रहे हैं मकान मालिक और गुडडी के अलावा कोई कुछ नही कह रहे हैं कोई किसी का पक्ष नही ले सकते और ये सही है।
वे बार बार कह रहे थे अंजली का हमारे सामने लेकर आओ मैने कहा अगर वो आना नही चाहती है तो मै उसे खिंचकर नही ला सकता, अब वो अपना भला बूरा सोंच सकती है मकान मालिक ने मुझे धमकी भी दी कि मै बहुत पहुंचा हुआ आदमी हुं मेरी बेटी एसआई में है दो मीनट में तुम्हारा खेल हो सकता है समझना है तो समझ जा। मैने भी साफ साफ कह दिया अच्छा होगा की आप जो चाहते हैं वो हो क्योंकि डरना अगर मैने सीखा होता तो आज इस तरह से आपके घर में नही आता औ इतने लोगों से अकेले बात करने की हिम्मत नही करता आप शौक से कर सकते हैं मुझे बताने की कोई जरूरत नही है और अब मै जा रहा हुं अगर किसी को और कुछ कहना है तो कह सकते हैं मै अपना पूरा दिन इसी काम के लिए समय नही दे सकता किसी ने कुछ नही कहा लेकिन नीचे जिस दरवाजे से मै आया था वो अंदर से बंद कर दिया गया है ये गुडडी की हि साजिश है मै फिर उपर गया और कहा मुझे लेट हो रहा है जिस किसी ने भी ताला बंद किया है खोल दो । गुडडी ने कहा मेरे पास चाबी नही है मै नही जानती किसने बंद किया है फिर मै नीचे उतरने लगा तो उसने मेरा पहना हुआ जैकेट पिछे से पकड़ लिया और बोली ये मरी बहन का है मै बिना पलटे ही अपने हाथ पीछे की ओर कर दिये उसने जोर से खिंचा और जैकेट सीधे उसके हाथ में आ गया मै नीचे आया दरवाजा कोई नही खोल रहे हैं मैने जोर से एक लात मारी दरवाजा खुल गया सभी देखते रहे
मै बाहर आया तो अनुजा दीदी की मम्मी वहां खड़ी थी उन्होने मेरा पक्ष लेते हुए कहा अगर तुम्हारा प्यार सच्चा है तो एक दिन तुम अपने मंजिल तक जरूर पहुंचोगे उनकी बातों ने मेरा दिल छु लिया और मै वापस आ गया जैसे ही मै अपने कमरे में जाने वाला था मेरी मकान मालकिन पास आई और बोली तेरे भैया का तबीयत खराब है जा कर ये दवाई पास के दुकान से ला दो मै वहीं से दुकान चला गया दवाई दुकान में थोड़ी भीड़ है लगभग 15 मीनट लग गये और आकर देखा तो मेरे घर के सामने दो गाड़ियां खड़ी हैं एक तो गुडडी की है दूसरी उसके मकान मालिक की, तीन लोग मेरे पास आये हैं आंटी ने कहा अंदर आंगन में खड़े हैं मै अंजली को कमरे में छिपा दी हुं मैने कहा छिपाने की क्या जरूरत है उसे निकाल दीजिए और मै अंदर की ओर गया उन्होने मुझे देखते ही कहा अंजली कहां है उसे तुमने कहां छिपा रखा है मैने कहा वो कोई छिपाने वाली सामान नही है कि मै उसे छिपा कर रखुं कही गई होगी आ जायेगी और मै तो अभी आ रहा हुं आप मुझसे पहले मेरे कमरे के पास आये हैं मै नही जानता आऐगी तो मिल लेना, उन्होंने दरवाजा खोलने को कहा लेकिन चाबी मेरे हाथों में नही है आंटी ने दूसरा ताला लगा दिया है मै जानता था जब तक मै यहां खड़ा रहुंगा ये भी मेरे सर पर खड़े रहेंगे मै बाहर निकल गया हमारे आन जाने के लिए दो रास्ते हैं एक तो बागान की तरफ निकलता है और दुसरा बाहर मेन रोड की ओर और मै अभी मेन रोड की ओर आकर खड़ा हूं वे भी मेर पीछे पीछे आ गये मै अंदर गया और आंटी से कहा अंाटी उसे बाहर निकलने को कह दीजिये मै नही चाहता की हमारी वजह से यहां और कोई परेशानी खड़ी हो और माहौल खराब हो और मै बाहर आ गया वे मुझे बात बात में अंदर करवान की लड़की को किडनैप करने का इलजाम लगा रहे हैं इतने में अंजली बाहर आ गई उन्होने उससे पुछा कहां थी उसने जवाब दिया बागान तरफ टहलने गई थी तुम हमारे साथ जाओगी या नही उनका सवाल था अंजली कुछ नही बोली मैने सभी से कहा अंदर चलिए अंदर चलकर बात करते है तमाशा बनाना ठीक नही है और मुझे यहां कोई नही जानते इस लिए मेरी इज्जत की परवाह मै नही करता कर रहा हुं तो बस आप लोगों की क्योंकि आप से मुझे कोई शिकायत नही है मेरा क्या है आज यहां हुं कल कहीं और चला जाउंगा मकान मालिक को मेरी ये बात जंच गई वो अंदर आ गये लेकिन गुडडी अंदर नही आना चाहती क्योंकि हर बात का बतंगड़ बनाना चाहती है लेकिन मकान मालिकोें के अंदर चले आने की वजह से उसे भी आना पड़ा। मै हर कल रात जो भी हुआ उसे भुल जाना चाहता हुं लेकिन ऐसा नही हो रहा है कारण है उनकी नादानी, मै तो यही कहुंगा।
अगर वो मेरे साथ खुश है तो किसी को क्यों तकलिफ हो रही है ऐसा क्या हो जाएगा अगर हम एक साथ रहेंगे तो किसी का कुछ नही जायेगा लेकिन पुराने नियमों से आज भी हमारी तकदीर को तौला जा रहा है जो मेरी नजरों में गलत है। मै अगर हिन्दु हुं तो क्या ये मेरी गलती है और क्या मुझे किसी को पसंद करने या किसी को अपना बनाने का कोई अधिकार नही है बस इसलिए की आज अंजली के पास जॉब है लेकिन मेरा रिश्ता तो बहुत पहले से जुड़ा है मै इसका जॉब देखकर यहां नही आया हुं ।
गुडडी के मकान मालिक ने कहा अंजली क्या तुम गुडडी के साथ रहना चाहती हो या इसके साथ अंजली ने कुछ देर तक सोंचा और कहा मै गुडडी के साथ नही रहना चाहती। जिससे मुझमें कुछ हिम्मत और आ गई लगा जैसे वो मेरे साथ रहने को तैयार है अपना सब कुछ छोंड़ सकती है मेरे लिए और यही मेरा सच्चा प्यार है क्योंकि एकतरफा प्यार नही है वो मेरे साथ है वो फिर कुछ न बोल सके और दोनो पति पत्नी मेरे कमरे से चले गये उनकी पत्नी ने अकेले में मुझसे कहा अच्छे से रहना कभी इसे कभी मत खोना।
लेकिन गुडडी अभी भी यहीं है वो मेरे मकान मालकिन के पास उनके दुकान में जाकर बैठ गई और मेरे बारे में मेरे घरवालों के बारे में उल्टा सीधा कह कर उनके कान भरने की कोशिश कर रही है लेकिन मेरी मकान मालकिन पुरी तरह से मेरे पक्ष में है 10ः30 हो गये हैं हमने अभी तक चाय तक नही बनाया है तभी उसकी बड़ी दीदी एमरेंसिया बस से उतरी गुडडी ने रात को ही उसे आने के लिए कह दिया था वो भी लैलुंगा में टीचर है वो तो आते ही रोने लगी इतनी जोर जोर से कहने लगी ऐसा नही होगा तुम ऐसा मत करो अंजली मै इस दौर से गुजर चुकी हुं और बहुत कुछ खो चुकी हुं प्यार कभी अच्छा नही होता उन्होने मुझे प्यार से कहा बाबू तुम मेरे बच्चे के सामान हो मैने तुम्हे अपने हांथों से नहलाया है तुम्हे अपने साथ खाना खिलाया है और तुम हमें ऐसा दुःख दोगे। मै कुछ न बोल सका मेरे आंखों से आंसू निकल पड़े उन्होने मुझे घर लौट जाने को कहा लेकिन मै लौटला नही चाहता वो अंजली को चलो और चलो की जिद लगा रहे हैं अंजली उनके साथ न जाकर अपने स्कूल जा रही है वो भी परेशान हो चुकी है वो मुझे छोंड़ कर जाएगी भी तो कैसे, मैन कभी उसका गम बांटा था और आज वो मुझे गम केसे दे सकती थी वो निकल कर अपने स्कूल चली गई उके जाते ही इन्होने अपना असली रूप् दिखाना शुरू कर दिया मेरे कमरे में रखी हर चीज को ये अपने साथ ये कह कर ले जा रहे है कि सभी मेरी बहन के पैसों का है मै इतना दुःखी हुं की इन्हे रोकने की हिम्मत भी नही है मै देखना चाहता हुं ऐ किसे प्यार करते हैं अंजली को या फिर इसके पैसों को लेकिन ये अंजली को नही उसके पैसों से प्यार करते हैं ये जानते हैं कि अंजली चाहे तो हर महिने 40 हजार रूपये घर ला सकती है इसलिए उसे खोना नही चाहते उन्होने मेरा सब कुछ ले लिया मेरे पास सिर्फ एक आईने के अलावा कुछ भी नही है मेरे पैसे मेरे और सभी कुछ यहां तक की उन्होने मेरा उपयोग किया हुआ टुथपेस्ट तक को नही छोंड़ा मैने भी उन्हे नही रोका , उन्होंने सामान गुडडी के रूम में रखा और फिर अंजली के स्कूल चले गये। दिन भर उसके सर पर खड़े रहे अंजली को मजबूर कर दिया गया लेकिन वो उनके साथ नही गई वो स्कूल में ही बच्चों के साथ सो गई और वे लौट गये अगले दिन वो मेर पास आई मै वैसा ही बैठा था जैसे उसने एक दिन पहले मुझे देखा था मै वहां से हीला भी नही था मेरे आंसू अभी भी बह रहे थे आंटी ने रोटी रात को दिया था खाने के लिए वो भी वैसा ही रखा हुआ है जैसे आया था मै सोच रहा था क्या मै गलत कर रहा हुं या फिर ये मेरे साथ गलत कर रहे हैं अंजली मेरे सामने है वो भी रेा रही है मै उसके आंसू आज नही रोक सकता मैने अपने आप पर काबू किया और उसे तैयार होने को कहा मै उसे उसकी बहनों के पास छोंड़ देना चाहता हुं क्योंकि और ज्यादा दुःख नही सह सकता वो जाना नही चाहती है मै उसे समझा भी नही सकता इसलिए उससे थोड़ा नाराजगी से पेश आ रहा हुं लेकिन वो जानती है ये मेरा बनावटी रूप है वो रोते रोते तैयार हो गई और फिर मै उसे उसके बहनों के पास छोंड रहा हुं मैने उनके सामने हाथ जोड़कर कहा लिजिए आपकी अमानत मै आप के हांथों में सौंप रहा हुं एक बार गलती हो गई थी अब मैने अपना काम कार दिया है समहालिए अपनी अमानत और मै लौटने लगा अंजली रो रो कर कह रही थी मुझे छोंड़कर मत जाओ मुझे भी अपने साथ ले चलो वो मेरी ओर दौंडने लगी लेकिन गुडडी ने उसका हाथपकड़ लिया और मै मजबुर होकर देखता रहा उन्होने मुझे चले जाने को कहा और मै अपने मन को कठोर करते हुए यहां से लौट रहा हुं अंजली की आवाजें अभी भी मेरे कानों तक आ रही हैं लेकिन मै पलट कर नही देख रहा हुं अगर मै पलटता तो वो और रोने लगेगी मैने अपना सायकल पकड़ा और आ कर एक नदी के किनारे बैठ कर रो रहा हुं मेेरे साथ ऐसा क्यों भगवान , कितना गलत किया है मैने?
मै जानता था वो अंजली के उपर हाथ उठा रहे होंगे मुझसे नही रहा गया मैने बड़ी दीदी को फोन किया और कहा दीदी जो होना था वो तो हो गया उसके उपर हाथ मत उठाना उसने मुझे ड़ांटा अंजली को दोनो बहनें मिलकर मार रही है वो रो रही है फांेन पर उसकी आवाजें आ रही है वो बार बार कह रही है मुझे उसके पास जाने दो, मुझे उसके पास जाने दो,
शाम हो गई है और अभी भी मै नदी के किनारे ही बैठा हुं रात के 11ः00 बज गये हैं नदी सुनसान ईलाका है चारो तरफ सन्नाटा छाया है लेकिन मुझे किसी चीज से डर नही लग रहा है बैठ कर भी क्या हो सकता था इसलिए मै अपने रूम में आ गया मकान मालकिन जाग रही है वो मेरा ही इंतजार कर रही है उन्हे मेरी चिंता है क्योंकि यहां उनके अलावा मेरा ख्याल रखने वाला अभी और कोई भी नही है अंजली थी जो इस वक्त पता नही किस हाल में होगी। उन्होने मुझसे पुछा खाना खाए या नही मैने जवाब दिया खा लिया है लेकिन उन्होने मेरे झुठ को पकड़ लिया और मुझे खाने के लिए कह रही है खाना लाकर उन्होने मेरे सामने रख दिया है थोड़ी देर तक वो मुझे निहारती रही लेकिन मै कैसे खा सकता था अंजली के बीना उसके बीना मै कुछ भी नही कर पा रहा हुं उसी की याद आ रही है कुछ समय के बाद आंटी उठकर अपने कमरे में चली गई। और मै कमरे में बैठा ही रहा,
रात कट गई लेकिन मुझे नींद नही आई बातें मन में घर सी गई हैं मन कहता है जा और जाकर उस ेले आ वो उसके अपने नही हैं जो उसकी खुशी नही समझते हैं तुम उसे उनके पास कैसे छोंड़ सकते हो।
सुबह हो गई है अंजली के लौट के आ जाने का इंतार कर रहा हुं मन कहता है वो जरूर आएगी लेकिन वो आज नही आई , और आज भी दिन इसी तरह से बीत गया।
अगले दिन भी मैने उसका इंतजार किया लेकिन वो नही आ सकी उसका मोबाईल भी उन्होने छीन लिया है जिससे मै उसका हाल भी नही जान सकता तीसरे दिन भी मै उसका इंतजार कर रहा हुं वो आई लेकिन गुडडी गाड़ी चला रही थी वो उसे उसके स्कूल छोंड़ने जा रही है अंजली ने मेरी ओर देखा लेकिन कुछ कह ना सकी और गुडडी ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और उसे स्कूल छोंड़ आई करीबन 2 घंटे के बाद मै अपने कमरे में ही लेटा था तभी उसके आने की आहट मेरे कानों में आई मै समझ गया अंजली ही है उसने आते ही मुझे सीने से लगा लिया मेरा हर दर्द कम हो गया है वो रो रही थी मेरा हाल देख कर लेकिन मैने उसे ज्यादा रोने नही दिया क्योंकि अब वो मेरे सामने है और मै उसे रोता नही देखना चाहुंगा। थोड़ी देर बैठकर हमने बातें की और फिर अंजली अपने स्कूल से खाना लकर आई थी दोनों ने साथ मिलकर एक दुसरे को खिलाया फिर अंजली ने कहा मै आ गई हुं अब कभी मत रोना। मन को कितना सुकुन मिल रहा था मै बता नही पाउंगा। हम दोनो अब फिर से एक दुसरे के साथ रहने लगे हैं गुडडी ने अब एक नया जाल बिछाया वो जानती थी की ये लोग ऐसे नही मानेंगे इस बार उसने अपनी मां और अपनी बहन फबी को बुलाया फबी ने बातें करनी शुरू की उसकी मां चुपचाप सुन रही थी वो तो अंत तक कुछ नही बोली लेकिन फबी और गुडडी की जुबान कैंची की तरह चल रही थी मुझसे और नही सहा जा रहा है आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा मैने उनसे सीधे शब्दों में कहा आप लोग मेरे घर से चले जाईये अपना समय खराब मत किजिए मुझे इन बातों से कोई लेना देना नही है वो मरी हर बात को रिकॉड कर रहे थे और मै जानता था वो ऐसा क्यों कर रहे हैं ताकी मेर घर में आकर वो ये सभ्ज्ञी बातें बता सकें मुझे ये तक एहसास हुआ जब वो मेरे परिवार के बारे में बहुत ही अच्छे अच्छे शब्दों का उपयोग कर रहे थे इतने अच्छे शब्द आज क्यों? क्योंकि अपनी सफाई जो देनी है उन्हे वो मेर घर आते और आकर बताते कि हमने उसे इतना समझाया लेकिन वो नही माना।
लेकिन शायद वो ये नही जानते की मै उनके दिमाग से आगे चलता हुं लेकिन कभी उनका बूरा नही सोंचता इसलिए अभी तक अपना जाल उनके लिए नही बिछाया है वो बार बार पुछ रहे हैं अंजली से तुम्हारा क्या रिश्ता है ये तुम्हारी कौन है सब कुछ देखते हुए भी यह पुछना क्या उनकी बेवकुफी को जाहीर नही करता है ?
मैने कुछ नही कहा मै चाहता था कि अंजली इसका जवाब दे लेकिन वो भी कुछ नही बोल रही है थोड़ा खराब तो लगा लेकिन मैने उन्हे यहां से बाहर निकाल दिया है अंजली को भी समझा दिया की तुम भी चली जाओ मुझे मेर हाल में छोंड़ दो। मै बहुत बहुत बहुत ही ज्यादा परशान हो चुका हुं या तो अब पागल हो जाउंगा या फिर पता नही क्या कर बैठंु। अंजली चली गई और ये भी अब जा रहे हैं अंजली दो तीन दिन अभी और नही आई। लेकिन हम कहां रह सकते हैं एक दुुसरे के बिना वा ेअब बस से आती है आठ बजे मेरे कमरे में रहती है 11 बजे तक फिर शाम को 4 बजे आती है और फिर 6ः30 में कृष्णा बस से गुडडी के पास चली जाती है बस वहां सोने जाती है और अब गुडडी भी अपना रवैया बदल रही है उसकी नजरों में जगह पाने के लिए वा ेअब राशन अपने पैसों से लाती है।
यही सिलसिला करीबन दो तीन माह तक चलता रहा और अचानक हम दोनों फिर से एक साथ रहने लगे हैं वे भी शांत है लगता है जैसे काई बड़ी प्लानिंग हो रही ह ैअब हमें साथ रहते साल भर से उपर हो गया है अंजली प्रेगनंेट है उसने मुझे उक दो बार हल्के से बताया था कि मेरी तबियत ख्राब सी लग रही है मेरा वजन भी बढ़ गया है लेकिन मै समझ नही पा रहा था और जब मुझे पता चला तो मै थोड़ा डर गया लेकिन फिर सोंचने लगा की हम इसे रखेंगे ये हमारा है लेकिन अंजली रखना नही चाहती उसका कहना है कि मेरे बडे़ भाई बहनों की अभी तक शादी भी नही हुई है मै इसे नही रख सकती। मैने उसे हजार बार समझाया लेकिन वो नही मान रही है मुझे दुःख तो हो रहा है लेकिन मै भी डर रहा हुं अंजली ने परेशानीयों का पहाड़ रख दिये मेरे सामने और मेरा हिम्मत भी जवाब दे गया
कहां रखेंगे इसे, हमार खुद का ठीकाना नही है, स्कूल में सभी मुझे क्या कहेंगे अभी तो हमारी शादी भी नही हुई है मैने कहा चलो मै तो पहले से ही कह रहा था कि शादी कर लेते हैं लेकिन तुमने हर बार बड़ो की बाते करके मेरा मुह बंद कर दिया मै उसे रूलाना नही चाहता था और मेर हाथों एक गलत काम हो गया
बस मेरी इतनी ही गलती हो गई उसके कहने पर मैने मेडिकल से दवाई ले ली और उसे दे दिया उसने गोलीयां खा लीें 48 घंटे बाद दुसरा डोज लेना था उसे लेकिन उसकी तबियत खराब होने लगी मुझे लगा की शायद दवाई का असर ऐसे ही होता है मैने 48 घंटे तक उसे देखा और उसे दुसरी डोज भी दे दी उसके बाद क्या था उसकी हालत और बिगड़ने लगी अभी हम हॉस्टल (अंजली के स्कूल) में ही हैं यहां हॉस्पीटल पास में ही है अगर उसे कुछ होगा तो मै अपने आप को माफ नही कर पाउंगा। मैने शांती दीदी को देखने को कहा हम भाई बहन की तरह रहते है लेकिन मैने उनसे ये बात छुपाई है कि उसे कौन सी गोलीयां दी गई हैं और बताता भी तो क्या, यही की हम पाप कर रहे हैं हम हत्यारे हैं वो उनका खयाल रख रही हैं और मै जनक और आसुतोष भैया के साथ बाहर बैठा हुं जनक भैया से नही रहा गया उन्होने दवाई का पर्चा देचा ही लिया जो मेरी सर्ट की उपरी जेब में ही रखी थी पहले वे मेडिकल स्टोर में काम कर चुके हैं तो उन्हे बहुत कुछ आता है वो देखते ही समझ गये और अकला पा कर मुझे टोंक ही दिये, आप तो पढे़ लिखे हैं हमसे ज्यादा फिर भी उेसा कदम क्यों उठा रहे हैं मै जानता हुं की ये किस चीज की दवा है मेरी नजरे शर्म से नीची हो गई और हम बातें कर ही रहे थे तभी अंजली ने मुझे बलाने के लिए किसी को भेजा आज कोई बच्चे नही सो रहे हैं सभी अंजली के ठीक हो जाने की प्रार्थना कर रहे हैं मै अंजली के पास गया उसने एक सीनियर बच्ची को बुलाया और सभी को सो जाने को कहा, सभी बच्चे सो गये अंजली ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रख दिया उसका पेट पत्थर की तरह कठोर हो गया था उसकी इस हालत का जिम्मेदार मै अपने आप को मान रहा था मैने शांती दीदी का बुलाया और उससे उसके पेट की जांच करवाई वो भी डर गई । वो भी जान गई हैं कि आखिर बात क्या है अब ये बात चार लोगों तक पहुंच गई है मुझसे उसकी ये हालत देखी नही जा रही है मैने फैसला कर लिया अब मै इसे अपने घर ले जाउंगा क्योंकि इसकेे घरवालों को से क्या उम्मीद करूं पहले बहस ही करेंगे मैने सुबह होने का इंतजार करने को कहा अंजली पुछा क्या तुम बस में सफर कर सकती हो, उसने जवाब दिया हां, हम रात भर जागते रहे सुबह के 4 बजे हैं मै अपने रूम आया हुं कुछ सामान पकड़ना था तभी आंटी ने कहा कैसे बाबू मिठाई कब खिला रहे हो मैने कहा किस बात की, अंजान मत बनो बाप बनने वाले हो मै डर गया ये बात रातों रात यहां तक कैसे आ गई हम तो स्कूल से निकले ही नही हैं मैने कहा ये आप क्या कह रहीं हैं आंटी उन्होने कहा अंजली का शरीर अब भरने लगा है मैने बात को काटते हुए कहा आप गतल सोंच रही हैं ऐसा कुछ भी नही है उसका तबीयत खराब है और मै उसे घर ले जा रहा हुं और मै सामान पकड़ कर आ गया। अंजली तैयार है हमने चार्ज स्वाती सहगल को दे दिया है जो अंजली के साथ ही पढ़ाती हैं। हमेशा मुझसे कहती हैं दामाद जी आप मेरे साथ सरगुजा वाला डांस किजिए ना आप बहुत अच्छा डांस करते हैं पता नही उन्हे कहीं से खबर मिल गई है मै कविताएं बनाता हंु, डांस भी करता हुं, कॉमेडी भी करता हुं और जनरल नॉलेज पढ़ने में रूची रखता हुं इसलिए उन्होने मेरे लिए एक किताब भी दी है जनरल नॉलेज की , अब हम जाने लगे हैं सभी कह रहे हैं अच्छे से ल जाना कोई परेशानी होगी तो खर जरूर करना,
करीबन 8ः00 बजे हमने गाड़ी पकड़ी और रायगढ़ करीबन 2 बजे आ गये मै उसे सीधे अपने घर ले आया हुं सोच रहा हु जो भी होगा मै सहने के लिए तैयार हुं मेरी गलती है तो सजा के लिए भी मै तैयार हुं घर में सिर्फ मेरी बहने हैं मै अंजली को अंदर ले कर आया छोटी बहन ने नमस्ते किया और अंजली ने मेरी बड़ी बहन को नमस्ते कहा मैने उसे पानी पिलाया मेरी बहने नाराज हैं मुझसे लेकिन अंजली के सामने नही दिखा रही हैं जब मै बाहर निकला तो मेरी बहन जो मुझसे दो तीन साल की बड़ी है बोल पड़ी क्यों लेकर आए हो मां बाबूजी को क्या कहोगे इसे तुम दो बार हमारे घर ला चुके हो और अब ये तीसरी बार है और सही था मां बाबूजी को कहने के लिए मेरे पास कुछ शब्द ही नही हैं  मैने अपना ध्यान घुमाया तो याद आया मेरी दो सौतेली चाचियां है, चाचा जी का डेथ हो चुका है उनकी तीन पत्नीयां थी जो सगी थी वो भी अब इस दुनिया में नही हैं चाचा जी से पहले ही वे स्वर्ग सीधार गई थी अब बचा मेरे पास एक ही उपाय मै अंजली को वहीं ले गया और कहा आपकी बहु आई है चाची ने उसे अंदर बिठाया कुछ बातें की मै दुसरी चाची से बात कर रहा था मैने दुकान से सामान खरिद लिया और चाची के हांथों मे दे दिया कुछ पैसे भी दिये लेकिन चाची को शराब पीने की गंदी आदत है उन्होने सारे पैसों का शराब पी लिया अंजली थकी हुई है और आराम कर रही है तभी चाची ने कहा मेरे ख्याल से लड़की पेट से है मै इनसे कुछ छिपाना नही चाहता और मैने हमारी कथा सुना दी और अपनी परेशानी का समाधान करने का उपाय पुछ रहा हुं तभी चाची ने बताया उनकी जानकारी में एक जगह है जहां इसका ईलाज हो सकता है 3-4 हजार रूपये लगेंगे मैने कहा आप पैसों की चिन्ता न करें मै हर हाल में पैसों का बंदोबस्त कर लुंगा । मेरा मन मुझे बार बार कहता रहा ऐसा क्यों ? लेकिन मै अंजली के फैसलों के सामने मजबुर हुं, और अब सोंचने से भी क्या हो सकता है हमारे लिए तो यही सही होगा की अंजली ठीक हो जाए, मैने अपने दो दोस्तों से मद्द मांगी उन्होने पहले तो मुझे पुछा अगर तुम दोनो सच्चा प्यार करते हो तो किसके डर से ये सब कर रहे हो ये तो तुम्हारे प्यार की निशानी है एक प्रुफ है की अब तुम दोनों को कोई परेशान नही करेंगे। कोई तुम्हे अलग करने की कभी सोंच ही नही पायेंगे। उनकी बातें दिल में कांटों की तरह चुभ रही थी लेकिन अब तक तो अंजली ने दवाई खा ली है जिसका असर भी दिख रहा है और उसकी हालत खराब होने लगी है ऐसे हालात में ये सब बातें करना ठीक नही ह ैचल कर मेरा साथ दो, अगले दिन हमने जाने का फैसला किया करीबन 2 बजे हम 5 लोग वहां जाने के लिए रवाना हुए जहां मेरी अंजली का ईलाज होने वाला था । आधे घंटे का रास्ता है हम 2ः30 बजे के आसपास वहां पहुंच गये। वहां जाकर मैने देखा एक नर्स जो अब रिटायर्ड हो चुकी है इस व्यवसाय को ही अपना चुकी है रोज का उसका यही काम है पता नही आज तक उसने कितनी हत्याएं की होगी, अभी मेरे सामने ही एक लड़की जा रही है अभी अभी उसका ईलाज हुआ है मुझे बहुत खराब लग रहा है मुझे दवाई नही देनी थी सब मेरी ही गलती है मै चाहता तो अंजली को रोक सकता था डांट फटकार कर लेकिन शायद कुछ ज्यादा ही मोहब्बत करता हुं उससे, इसलिए उसी के फैसले को मैने मान लिया। और आज मेर सामने यह सब हो रहा है भगवान कभी किसी के सामने ऐसी परेशानी मत खड़ी होने देना क्योंकि आज पहली बार मेरे हाथ से एक पाप हो रहा है और मै अपने आप को कभी माफ नही कर सकता, लेकिन अंजली को कुछ मत होने देना भगवान......
हम तीनों दोस्तों को बाहर जाने के लिए कहा गया। हम बाहर आ गये और बातें करने लगे। आधे घंटे के बाद चाची अंजली को लेकर बाहर आई और चलने के लिए कहा गया। हमने गाड़ी स्टार्ट की और वापस आ गये। बच्चा पाँच माह का हो चुका था और हमने देर कर दी थी अंजली मुझसे छुपाती रही की ढ़ाई माह हो रहा है और मै उसे ही सही समझता रहा। हम घर आ गये अंजली को बाईक में बैठने में परेशानी हो रही थी लेकिन उसने बहुत हिम्मत की और हम वापस चाची के घर में आ गये। अब मै अंजली को एक मिनट भी अपनी नजरों से दूर नही रख सकता क्योंकि उसकी डिलवरी किसी भी समय हो सकती है और ऐसे में मेरा साथ रहना बहुत जरूरी है। चाची मेर साथ हैं नर्स ने 24 घंटे का समय दिया है रात हो चुकी है अंजली सो रही है और मै और चाची बाहर बैठे बात कर रहे हैं छोटी चाची अंजली के पास गई उससे बह रही है ऐसा क्यों किया एक सबूत था तुम्हारे पास जिससे तुम कह सकती थी और वो तुम्हे कभी धोखा नही दे पाता इधर बड़ी चाची मुझसे कह रही है ये फैसला वो क्यों ली।
अंजली और मै कुछ भी नही कह सके। चाची अंजली के साथ सोने चली गई सच कहता हुं अगर मै कदम उठा कर उसे रायगढ़ नही लाता और चाची ने हमारा साथ नही दिया होता तो आज मै उसे नही देख पाता। सुबह नींद जल्दी ही खुल गई करीबन 4 बजे होंगे। अंजली दर्द से कराह रही है मै बहुत चिंतित हुं दिन के 10ः30 बजे होंगे अंजली ने एक बच्चे को जन्म दिया वह लड़का था ऐसा चाची ने बताया। आज भी वो चेहरा मेरे सामने नजर आ रहा है चेहरा अंजली का है बहुत ही संुदर बिल्कुल अंजली। हाथ पैर मेरी तरह लंबे लंबे। कितना प्यारा सा चेहरा था उसका हमेशा याद करूंगा तुुझे मेरे बच्चे। बहुत दुःख हुआ लेकिन अंजली मेरे सामने है मेरे लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। कुछ देर बाद अंजली की तबीयत खराब होने लगी शरीर से पानी पूरी तरह निकल जाने के बाद वो कमजोर हो गई है मैने डॉक्टर को बताया कि ऐसी बात है आप एक बार जा कर देख लिजिए। डॉक्टर भी मेरी मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था उसने कुछ ज्यादा ही रूपयों की मांग मेरे सामने रख दी जो अभी मेरे पास नही थे और वो नही आए। मै मंदिर में जाकर प्राथर्ना की और भगवान से कहा हे प्रभु मुझे जिंदगी में और कभी कोई खुशी मत देना लेकिन अंजली को कुछ नही होना चाहीए। और मै वापस आ गया अंजली को दो दिन लगे ठीक होने में और दो दिनों के बाद वो पूरी स्वस्थ लग रही थी ये भगवान का चमत्कार ही था चाहे लोग उसे नही मानते लेकिन अब मै उसे मानने लगा हुं अब अंजली और मै जाना चाहते हैं वापस अपनी दुनिया में, अपने जीवन में। मैने अपना पहला बच्चा खो दिया इस बात का मुझे गम है लेकिन अंजली को वापस पाकर मुझे मेरी दुनिया वापस मिल गई।
27 मार्च को हम बतौली आ गए मैने एक सी.एल लिख दिया है अंजली अभी कुछ दिनों तक मेरी निगरानी में रहेगी और जब उसे ठीक लगेगा वो स्कूल वापस जा सकती है। लेकिन हमारी समस्या अभी समाप्त नही हुई है उसका दुध जम रहा है और अगर उसे नही निकाला गया तो शायद और बड़ी समस्या हमारे सामने आ सकती है मैने पता किया तो पता चला की पम्प लेना होगा जो मेडिकल स्टोर मे उपलब्ध हो जाएगा मैने खरीद लिया। अब थोड़ा आराम से वो सो सकती थी लेकिन ये समस्या करीबन 2 माह तक चलती रही और अंजली का शरीर पूरी तरह कमजोर हो चुका है। अभी तक ये बात किसी को पता नही चली है ।  बहुत तकलीफें हम दोनों ने साथ मिल कर झेली हैं । जितनी मैने उससेे कही ज्यादा अंजली ने ।


जब तक मेरी सांसें चलेंगी तब तक मेरी अंजली मेरे साथ होगी मेरे आंसूओं में , मेरे लिए वो कभी मर नही सकती, उसका शरीर चाहे किसी और के पास है लेकिन मेरी यादों में उसका सब कुछ है मेरे पास ....
इस बार भगवान से नही अंजली से कहता हुं तुं हमेशा खुश रहना क्योंकि
 तेरी खुशी तेरे हांथ में है


good by bittu
Bajrang yadav (Raigarh C.G)
9406353228,9039024494
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